स्वास्थ्य बीमा के प्रकार : जानिए Mediclaim policy कितने प्रकार की होती है ?

मेडिक्लेम पॉलिसी यानि स्वास्थ्य बीमा के विषय पर हमने पिछले पोस्ट में बताया था कि कैसे स्वास्थ्य बीमा बीमाधारक के अस्पताल में भरती होने पर तथा इलाज पर जो खर्चा होता है, उस रकम की भरपाई करता है। अस्पताल में जब मरीज भरती हो जाता है, तब बीमारी तथा शारीरिक तकलीफों के साथ-साथ और भी कई मुसीबतों का उसे सामना करना पड़ता है। जैसे—अस्पताल में भरती होने की वजह से उसके नौकरी-व्यवसाय पर असर पड़ता है, छुट्टी लेनी पड़ती है, रोज की आमदनी रुक जाती है, व्यवसाय डूब जाता है, नौकरी में मिलने वाली तरक्की पर बुरा असर पड़ सकता है, व्यवसाय में कोई बड़ा व्यावसायिक मौका हाथों से निकल सकता है। ये सारे व्यक्तिगत नुकसान के उदाहरण हैं, परंतु इसके साथ-साथ परिवारजनों के रोजमर्रा के जीवन पर असर पड़ता है। उनकी नौकरी पर, व्यवसाय पर असर पड़ता है। अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान ही होता है। परिवार में चिंता छा जाती है। इन सभी का असर परिवारजनों के उत्साह तथा कार्यक्षमता पर पड़ता है। यह तो केवल मानसिक तथा सामाजिक असर है लेकिन बीमार पड़ने से मरीज के परिवार के साथ-साथ पड़ोसियों, अपने पेशे के सहकर्मियों, बैंकों, व्यापारिक-व्यावसायिक संबंधों पर भी असर पड़ता है। यानी कुल मिलाकर अस्पताल में भरती होनेवाला मरीज बेचारा खर्चे की वजह से और ‘गरीब’ होने लग जाता है। बीमारी उसकी सारी बचत को खत्म कर देती है, प्रॉपर्टी बेचने पर मजबूर कर देती है, उधार पैसे लेने पर मजबूर कर देती है और एक तरह से उसे दिवालिया बना देती है।

अस्पताल का बिल, डॉक्टरों की फीस, स्पेशलिस्ट की फीस, ऑपरेशन, दवाइयों का खर्चा आदि के साथ अन्य खर्चे तो है ही। कुल मिलाकर अस्पताल में भरती होने पर विविध मार्गों से निरंतर रुपया खर्च ही होता रहता है। दिनोंदिन यह और महँगा भी होता जा रहा है।

बहुत सारी बीमारियों के अतिरिक्त अस्पताल में भरती होने का एक और मुख्य कारण है ‘दुर्घटना’। प्रतिदिन दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी होती दिखाई देती है। यह तो अचानक हो जानेवाली बड़े खर्चे की विपदा है।

सिर्फ हॉस्पिटलाइजेशन अथवा सिकनेस पॉलिसी जो पहले बनती थी, अब उसका ढाँचा बहुत बदल गया है। हॉस्पिटलाइजेशन से संबंधित कई जोखिमों एवं हानियों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक जोखिम के लिए एक अलग पॉलिसी या दो-तीन जोखिमों की एकत्रित रूप से पॉलिसी बनवाना, यही स्वास्थ्य बीमा का रूप बन गया है। भारत में पहले जनरल इंश्योरेंस का एक हिस्सा ही स्वास्थ्य बीमा रहा करता था, परंतु निजीकरण तथा आई.आर.डी.ए. एक्ट-1999 आने के बाद से जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के साथ-साथ अलग रूप से हैल्थ इंश्योरेंस कंपनियाँ तथा लाइफ इंश्योरेंस कंपनियाँ भी कई प्रकार की बीमा पॉलिसियाँ लेकर आई हैं। साथ ही केंद्र तथा राज्य सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना भी उपलब्ध है। Types of Health insurance policy

स्वास्थ्य बीमा के प्रकार : मोटे तौर पर स्वास्थ्य बीमा के प्रकार ये है

स्वास्थ्य बीमा के प्रकार : जानिए Mediclaim policy कितने प्रकार की होती है Health insurance ke parkar baare mein bataye

स्वास्थ्य बीमा के प्रकार

  • General Insurance Company द्वारा दिया गया स्वास्थ्य बीमा
  • Life Insurance Companies द्वारा दिया गया स्वास्थ्य बीमा
  • Health Insurance Companies द्वारा दिया गया स्वास्थ्य बीमा
  • केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा दिया गया स्वास्थ्य बीमा

जनरल इंश्योरेंस कंपनी की पॉलिसी के तीन मुख्य प्रकार हैं |

  1. A) शुद्ध स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी
  • मेडिक्लेम पॉलिसी यानी रीएंबर्समेंट ऑफ हॉस्पिटलाइजेशन एक्सपेंसेस पॉलिसी।
  • हॉस्पिटलाइजेशन होने के बाद प्रतिदिन के भत्ते की पॉलिसी।
  • क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी।
  • खास बीमारी होने पर ही भरपाई देने वाली पॉलिसी।
  • टॉप-अप अथवा सरप्लस कवर देने वाली पॉलिसी।
  • भविष्य स्वास्थ्य पॉलिसी-निवृत्ति के पश्चात् अस्पताल में भरती होने के लिए पॉलिसी।

ये सभी पॉलिसियाँ निजी तौर पर पूरे परिवार के लिए, विद्यार्थी समूह तथा ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी के रूप में ली जा सकती हैं।

  1. B) प्रवास (Travel) से संबंधित स्वास्थ्य बीमा
  • ओवरसीज मेडिक्लेम पॉलिसी। Overseas Mediclaim insurance
  • डोमेस्टिक ट्रैवलर्स पॉलिसी। Domestic Travelers insurance Policy
  • नियमित रूप से प्रवास करनेवाले व्यक्तियों के लिए पॉलिसी।

उपरोक्त सभी पॉलिसियाँ निजी तौर पर, परिवार तथा विद्यार्थियों के लिए ली जा सकती हैं। इन्हें किन्हीं खास देशों के प्रवास के लिए भी लिया जा सकता है।

  1. C) . वैयक्तिक दुर्घटना तथा दुर्घटना मेडिक्लेम पॉलिसी
  • निजी दुर्घटना तथा विकलांगता की पॉलिसी।
  • दुर्घटना मेडिक्लेम पॉलिसी (राह में हुई दुर्घटना तथा काम पर हुई दुर्घटना)।
  • महिला तथा बच्चों के लिए दुर्घटना संरक्षण पॉलिसी।
  • विद्यार्थी बीमा योजना।

ऊपर दी गई सभी पॉलिसियाँ वैयक्तिक, परिवार के लिए, विद्यार्थियों तथा बड़े ग्रुप के लिए सामूहिक तौर पर ली जा सकती हैं।

हैल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी

  • हैल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी।
  • हॉस्पिटलाइजेशन तथा क्रिटिकल इंश्योरेंस।।
  • किन्हीं खास बीमारियों के लिए हैल्थ इंश्योरेंस।
  • सीनियर सिटिजन हैल्थ इंश्योरेंस।
  • फेमिली हैल्थ इंश्योरेंस।
  • कॉर्पोरेट हैल्थ इंश्योरेंस।
  • एक्सिडेंट इंश्योरेंस।
  • ट्रेवल इंश्योरेंस।
  • स्टुडेंट (स्नातक) इंश्योरेंस।
  • माइक्रो हैल्थ इंश्योरेंस।

लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की पॉलिसी : राइडर

  • एक्सीडेंटल डैथ राइडर।
  • एक्सीडेंटल डिसएबिलिटी राइडर।
  • क्रिटिकल इलनेस पॉलिसी।
  • हॉस्पिटलाइजेशन के दौरान प्रतिदिन नियमित रकम देनेवाली पॉलिसी।
  • किसी नियत किए गए (संभाव्य) रोग के हो जाने पर संरक्षण देनेवाली पॉलिसी।
  • अस्पताल में भरती हो जाने पर खर्चे की बचत की पॉलिसी।

केंद्र तथा राज्य सरकार की स्वास्थ्य बीमा योजना

  • एम्प्लाइज स्टेट इंश्योरेंस स्कीम (S.I.S.)।
  • सेंट्रल गवर्नमेंट हैल्थ स्कीम (G.H.S.)।
  • यूनिवर्सल मेडिक्लेम स्कीम।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (S.B.Y.)
  • जन आरोग्य, हिट एंड रन सॉलेशियम फंड, किसान दुर्घटना बीमा योजना।
  • माइक्रो हैल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी।

स्वास्थ्य बीमे से संबंधित कई प्रकार की पॉलिसियों से हमने आपको परिचित करवा दिया है। लगभग सभी कंपनियों ने (लाइफ, जनरल तथा हैल्थ बीमा) ये सभी प्रकार की पॉलिसियों को बाजार में उपलब्ध करवा दिया है। जरा सा इधर-उधर बदलाव कर अपनी पॉलिसी की अलग पहचान बनाने का प्रयास भी उनमें दिखाई देता है। परंतु मूल ढाँचा समान ही रखा गया है।

जनरल तथा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम तथा लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी में क्या फर्क है? 

  • जनरल तथा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियाँ मेडिक्लेम पॉलिसी बेचती हैं।
  • मेडिक्लेम तथा हेल्थ इंश्योरेंस राइडर की रचना में मुख्यतया फर्क है। दोनों की रचना तथा उद्देश्य अलग अलग हैं।
  • यदि पॉलिसी लेने के एक वर्ष के अंदर मेडिक्लेम पॉलिसी होल्डर को अस्पताल में भरती होना पड़ा, तब आनेवाला खर्च, सम-एश्योर्ड की तय सीमा तक दिया जाता है। हेल्थ इंश्योरेंस राइडर में पॉलिसी की समूचे कालावधि में पहले से दर्ज बीमारियों में से यदि एक बीमारी हो जाती है, तब पहले से तय रकम अथवा सारी सम-एश्योर्ड के अनुपात में बीमारी के अनुसार रकम दी जाती है।
  • जनरल इंश्योरेंस कंपनियाँ तथा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियाँ, मेडिक्लेम पॉलिसी बेचती हैं। इसे ही जनरल तथा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी कहा जाता है। हेल्थ इंश्योरेंस राइडर पॉलिसी, लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा बेची जाती है।
  • मेडिक्लेम पॉलिसी की मियाद एक वर्ष की होती है। हेल्थ इंश्योरेंस राइडर पॉलिसी मूलतः लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की अवधि के बराबर होती है।
  • मेडिक्लेम एक अलग स्वतंत्र पॉलिसी है, जबकि हेल्थ राइडर एक पूरक पॉलिसी है, जो मूल लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ ली जा सकती है। इसे अलग से नहीं लिया जा सकता।
  • मेडिक्लेम पॉलिसी के लिए पॉलिसीधारक को कम-से-कम 24 घंटे अस्पताल में भरती होना अनिवार्य है। (किन्हीं अपवादों को छोड़कर) लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी होल्डर को तब दी जाती है, जब वह बीमारी का निदान होने के दिन से आगे 28 दिन जीवित रहता है।
  • जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के मेडिक्लेम में स्टैंडर्ड एक्सक्लूजंस यानी अस्पताल में भरती होने का खर्च वापस न देना पड़े, ऐसी बीमारियाँ भी दर्ज रहती हैं। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी में पहले से कुछ तय बीमारियों के अलावा और किसी बीमारी के लिए क्लेम नहीं दिया जाता।
  • मेडिक्लेम पॉलिसी का प्रतिवर्ष नवीनीकरण करना पड़ता है। हेल्थ इंश्योरेंस राइडर एक लंबे समय की बहुवार्षिक पॉलिसी है। इसकी किश्त प्रतिवर्ष भरनी पड़ती है।
  • जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिकल पॉलिसी में ‘नो क्लेम बोनस’ मिलता है, परंतु लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की हेल्थ इंश्योरेंस राइडर पॉलिसी में ‘नो क्लेम बोनस’ नहीं मिलता।
  • जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी के पूरे प्रीमियम की रकम पर आयकर विशेष धारा 80-डी के तहत छूट मिलती है। लाइफ इंश्योरेंस के हेल्थ इंश्योरेंस राइडर के प्रीमियम की रकम को आयकर विशेष धारा 80-सी के तहत छूट मिलती है।
  • जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के मेडिक्लेम में कैशलेस क्लेम सेटलमेंट (तय करने) की सुविधा मिलती है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के मेडिक्लेम में कैशलेस सुविधा नहीं मिलती।
  • जनरल हेल्थ इंश्योरेंस का मेडिक्लेम 45 वर्ष की उम्र तक बगैर किसी चिकित्सीय जाँच के मिल सकता है।
  • लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के हेल्थ इंश्योरेंस राइडर के लिए चिकित्सीय जाँच अनिवार्य है।
  • जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी का नवीनीकरण जीवन के अंत तक किया जा सकता है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी मूल पॉलिसी के साथ अथवा अधिकतम 65 वर्ष की उम्र के बाद बंद हो जाती है। (किन्हीं कंपनियों में यही उम्र 70 अथवा 75 वर्ष तक बढ़ाई गई है।)
  • जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी बेचनेवाले एजेंटों को लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी बेचनेवाले एजेंटों से कम कमीशन मिलता है।
  • जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी का क्लेम प्रत्यक्ष खर्च के अनुसार मिलता है। लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी से क्लेम के खर्च का कोई संबंध नहीं होता है, वहाँ सिर्फ तय रकम मिलती है।
  • जनरल हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की मेडिक्लेम पॉलिसी में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी बची हुई सम-एश्योर्ड सुरक्षा, पॉलिसी की मियाद खत्म होने तक मिलती रहती है। लाइफ इंश्योरेंस की मेडिक्लेम पॉलिसी में पॉलिसी के कुल समय में अधिकतम रकम की एक सीमा तय रहती है।

स्वास्थ्य बीमा का वर्गीकरण निम्न प्रकार से भी किया जा सकता है

  • Personal Health Insurance
  • Family Health Insurance
  • Group Health Insurance
  • Corporate Health Insurance
  • विद्यार्थी बीमा/वरिष्ठ नागरिक हैल्थ इंश्योरेंस
  • ग्रामीण/अर्धशहरी/शहरी हैल्थ इंश्योरेंस
  • माइक्रो हैल्थ इंश्योरेंस

कई ऐसी बीमा कंपनियाँ हैं जो बीमारी की जाँच के लिए सुविधा संपन्न योजनाएँ चलाती हैं। डॉक्टर की फीस, कमरे का किराया, सर्जरी तथा ऑपरेशन खर्च, दवाइयों आदि पर कुछ प्रतिशत की छूट भी देती है । याद रहे कि इस प्रकार की कंपनियाँ फरजी होती हैं और उन्हें स्वास्थ्य बीमा बेचने की अनुमति भी नहीं होती है। साथ ही यह भी देखना चाहिए कि अस्पताल के शुल्क (Rate) तथा कंपनी के शुल्क में कितना फर्क है। प्रत्यक्ष रूप से मिलनेवाली छूट भी कितनी है। कई बार ऐसा भी होता है कि ऐसी फ्रोड कंपनियाँ किसी खास अस्पताल से जुड़ी होती हैं और ऐसी हालत में मरीज के पास कोई अन्य विकल्प नहीं रह जाता है ।

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदते समय अच्छी तरह परखकर ही खरीदना चाहिए। लाइफ तथा जनरल, शुद्ध स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा आदि का सही मिश्रण ही आप आवश्यकता के अनुसार चुनें। स्वास्थ्य बीमा कभी भी लाभ के लिए नहीं लिया जाता है इसमें आपको कोई धन वापिस नहीं मिलेगा। यह पॉलिसी आपके बीमार होने पर आपकी आर्थिक सहायता करने का अच्छा सहारा भी सिद्ध होती है। जिस तरह हम प्रतिदिन चाय-पानी पर सहज खर्च करते हैं और उससे कोई आर्थिक लाभ नहीं होता, ठीक उसी तरह से अपने स्वयं के तथा परिवारजनों के लिए इस खर्च को समझकर चलें।

लोगो की आय बढने के साथ ही स्वास्थ्य बीमे का क्षेत्र पूरी गति से बढ़ रहा है। कुछ नए प्रकार की बेहतर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियाँ भविष्य में बनती रहेंगी और आती रहेंगी। पहले सिर्फ जनरल इंश्योरेंस कंपनियों के एजेंट ही मेडिक्लेम पॉलिसियाँ बेचा करते थे, लेकिन आज एल.आई.सी. के एजेंट भी मेडिक्लेम पॉलिसियाँ बेचते हैं। हैल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के एजेंट भी मेडिक्लेम पॉलिसियाँ बेचते हैं। हैल्थ इंश्योरेंस बीमे के क्षेत्र में लाइफ इंश्योरेंस तथा जनरल इंश्योरेंस के नाम पूरी गति से विस्तारित हो रहे हैं। खुद अपने लिए तथा परिवारजनों के लिए आरोग्य बीमा खरीदते समय पूरी और सही जानकारी प्राप्त करना बहुत ही जरूरी है, इस बात का ध्यान अवश्य रखें।

अगले पोस्ट में हम ऊपर दी गई इन सभी स्वास्थ्य बीमा पालिसी के बारे में बताएँगे जिससे आप अपनी जरुरत के अनुसार एक सही स्वास्थ्य बीमा को चुन सके | उम्र तथा “बीमारी की फॅमिली हिस्ट्री” को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य बीमे का चुनाव करना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है | कम खर्च में आप अपने आपको सुरक्षित कर सकते है |

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