गेहूं के औषधीय गुण, उपयोग तथा फायदे

गेहूं आम भारतीय परिवारों का मुख्य आहार है, खासकर उत्तर भारत में। इसको पीसकर इसके आटे से गरमागरम चपातियाँ व दूसरे तमाम व्यंजन तो बनाए ही जाते हैं, इसका अपना अलग औषधीय महत्व भी होता है तथा चिकित्सा जगत में इसके औषधीय प्रयोग भी किए जाते हैं। गेहूँ का वानस्पतिक नाम ट्रेइटीकम सैटाइवम (Triticum sativum) है। गेहूं में 68 से 70% तक कार्बोहाइड्रेट, 8 से 24% तक प्रोटीन तथा 1 से 2% वसा एवं 1.5 से 2% तक राख़ होती है। गेहूँ के दाने कड़े या मुलायम और सफेद या या लाल होते हैं। कड़े दाने वाले गेहूं में प्रोटीन अधिक और स्टार्च कम होता है। खाने के लिए कड़े दाने वाले गेहूं का उपयोग किया जाता है और सफेद गेहूँ अच्छा समझा जाता है। गेहूँ के चोकर में लौह, कैल्सियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, मैग्नीशियम आदि खनिज पदार्थ पाये जाते हैं। इसीलिए गेहूँ के आटे की अपेक्षा उसके चोकर का या चोकर सहित आटे का चिकित्सा में अधिक महत्व है जिसे सामान्यतः लोग आटे से छानकर अलग करके पशुओं को खिला देते हैं।

गेहूं शक्तिवर्द्धक होता है। इसके सेवन से शरीर को शक्ति मिलती है। इसके दानों को भिगोकर, उबालकर खाने से शरीर को काफी ऊर्जा मिलती है। गेहूं की पत्तियों का रस (गेंहू के ज्वार का रस) बहुत लाभप्रद होता है। यह न सिर्फ रक्तशोधन का कार्य करता है, बल्कि स्नायु दुर्बलता को भी दूर करता है। यह शरीर के विषैले तत्वों को बाहर करने में मददगार साबित होता है।

गेहूं के औषधीय गुण तथा घरेलू उपाय

गेहूं के औषधीय गुण तथा घरेलू उपाय Gehu wheat ke fayde labh gun

गेहूं के औषधीय गुण

  • गेहूं के आटे का चोकर विशेष रूप से कब्ज आदि की शिकायत में अत्यन्त लाभप्रद सिद्ध होता है। चोकर की रोटी बनवाकर खाने से कब्ज में आराम मिलता है।
  • बवासीर के रोगी के लिए भी चोकर की रोटी फायदेमन्द रहती है।
  • पेचिश आदि की शिकायत में भी चोकर की रोटी फायदा करती है।
  • त्वचा की सफाई व स्नान आदि में भी महिलाएँ गेहूं के आटे का प्रयोग करती हैं। इसे उबटन के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।
  • जलने पर गेहूं के आटे को गूँथ कर जले हुए स्थान पर लगाने से फफोले पड़ने की संभावनाएँ घट जाती हैं, और तीव्र जलन से भी आराम मिलता है।
  • नया पैदा हुआ गेहूं थोड़ा गरम होता है। यह दस्तावर भी होता है। इसलिए इसे धोकर इस्तेमाल करना चाहिए।
  • शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति यदि रोजाना तीन-चार गिलास गेहूं की पत्तियों का रस पीएं, तो वह जल्दी ही हष्ट-पुष्ट हो सकता है।
  • गेहूं के अंकुरित दानों को चबाने से मुंह की दुर्गन्ध तो दूर होती ही है, दांत और मसूढ़े भी इससे मजबूत होते हैं।
  • शारीरिक श्रम करने वालों को इसका सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह काफी ऊर्जा देता है।
  • गेहूं के आटे की पुल्टिश बांधने से फोड़ा-फुन्सी आसानी से फूट जाते हैं और रोगी को पीड़ा का सामना नहीं करना पड़ता है।
  • मन्दाग्नि या भूख कम लगना – गेहूँ के चोकर युक्त आटे में अजवायन और हल्का-सा नमक डालकर बनायी गयी रोटियां भुनी हुई हींग से युक्त सब्जी के सूप या साबुत मूंग की दाल के साथ खाने से भूख खुलकर लगने लगती है।
  • गला खराब होना- एक कटोरी पानी में एक मुट्ठी गेहूं का चोकर डालकर कटोरी पर ढक्कन लगा कर इसे उबालें। फिर इसमें दूध और चीनी मिला लें। इसे चाय की तरह पूंट-घूट पीने से गला ठीक हो जाता है और आवाज साफ निकलने लगती है।
  • खांसी- एक सप्ताह तक सुबह-दोपहर-शाम दिन में तीन बार एक-एक कप गेहूँ की चाय बनाकर रोगी को पिलाने से सूखी और तर दोनों प्रकार की खांसी दूर हो जायेगी। गेहूं की एक कप चाय बनाने के लिए 15 ग्राम दलिया, जरा-सा सेंधा नमक 250 ग्राम पानी में उबालें । 50-60 ग्राम पानी शेष रह जाने पर उसमें एक चम्मच शहद और एक चम्मच दूध मिला देने से एक कप गेहूँ की चाय तैयार हो जाती है।
  • ज्वर- रोगी को औषधि के रूप में सुबह दोपहर शाम आधा-आधा गिलास गेहूं घास का रस पिलाते रहने एवं भोजन के रूप में छिलकों सहित मूंग की पतली दाल में हल्का-सा नमक मिलाकर खिलाते रहने से बुखार के रोगी को लाभ मिलता है |
  • गेहूं की रोटी को एक ओर सेंक लें और दूसरी ओर कच्ची रखें। कच्ची ओर तिल का तेल लगाकर उसे दर्द वाले स्थान पर बांध दें। इससे दर्द दूर हो जायेगा।
  • गठिया- रोगी को सुबह-शाम 30-30 ग्राम गेहूँ-घास का रस पिलाते रहने तथा भोजन के रूप में सोयाबीन से तैयार दूध और रोटी खिलाते रहने से कुछ ही दिनों में गठिया रोग से राहत मिलती है ।
  • पेशाब में जलन – रात को 15 ग्राम गेहूं 250 ग्राम पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इसे छान कर पानी में 25 ग्राम मिश्री मिलाकर पीने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।
  • स्तनों की सूजन, इसे आम भाषा में थनैला कहा जाता है जिसमें दर्द भी होता है। चोकर को थोड़े से सिरके में पकाकर इसके सहने योग्य गर्म रह जाने पर स्तनों पर इसका लेप करते हैं। लेप सुख जाने पर स्तनों को गर्म पानी से ही धोयें और स्तनों पर पुनः लेप चढ़ा कर पट्टी बांध दे। दो-तीन लेपों से ही सूजन उतर जाती है और दर्द दूर हो जाता है।
  • सूजन- मुट्ठी भर गेहूं थोड़े अधिक पानी में डालकर उबालें । इस गर्म-गर्म पानी से सूजन वाली जगह को दिन में दो-तीन बार सेंकने से सूजन बहुत कम हो जाती है।
  • मोच आना -गेहूँ के आटे और हल्दी को तेल में भूनकर पुल्टिस बनाकर मोच वाले भाग पर बांध देने से मोच में बहुत लाभ पहुंचता है।
  • हड्डी टूट जाना -गेहूं के चोकर के हलवे में गुड़ मिलाकर खाने से टूटी हड्डी जल्दी जुडती है।
  • मुंहासे -एक सप्ताह तक सोने से पहले 1 से 2 चाय की चम्मच भर गेहूं के चोकर के पानी से चेहरे की धुलाई करने से मुंहासे मिट जाएंगे और चेहरा निखर आयेगा।
  • आग से जल जाने पर- गेहूं का आटा गूंथ कर उसका जले हुए स्थान पर लेप करने से अथवा गेहूं-घास के रस में साफ कपड़े की पट्टी तर करके उसे जले हुए स्थान पर लपेट देने से जलन शान्त होती है, दर्द दूर होता है और जख्म शीघ्र ही भरने लगता है। गेहूं-घास के रस से तर रखने के लिए दिन में 2-3 बार पट्टी बदल देनी चाहिए।
  • चर्म रोगों में : गेहूँ के दानों को तवे पर खूब अच्छी तरह भून लें, जब वे राख की तरह हो जाएँ तो इन्हें खरल में खूब बारीक पीस लें। इस बारीक राख को शुद्ध सरसों के तेल में अच्छी तरह मिलाकर पीडित स्थान पर लगाएँ, इसके लगातार प्रयोग से कई पुराने चर्मरोग भी ठीक हो जाते हैं।
  • उत्तम पाचन के लिए : गेहूँ का थोड़ा-मोटा आटा (चोकर सहित) गूंधकर एक घंटा तक रख छोड़े, फिर इस आटे की रोटियाँ बनाकर सब्जी, दाल या दही आदि के साथ खाएँ तो खाना जल्दी पच जाता है, पेट में अपच या गैस नहीं बनती है। पेट में कब्ज भी नहीं बनती है।
  • जोड़ों का दर्द : गेहूँ को तवे पर खूब भून लें, इसे पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 10 ग्राम राख रोजाना सुबह शहद के साथ चाटें। इसके सेवन से टूटी हड्डी जुड़ने में मदद मिलती है। कमर तथा जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।
  • कीट-दंश के लिए : कोई जहरीला कीट या ततैया, मधु मक्खी आदि काट ले तो गेहूं के आटे में सिरका मिलाकर प्रभावित स्थान पर आटे का लेप कर दें तो सूजन व दर्द कम हो जायेगा |

निम्नलिखित विधियों द्वारा गेहूं के चोकर का हलवा या बर्फी बनाकर इसे चिकित्सीय उपयोग में लाया जा सकता है।

  • चोकर का हलवा – 250 ग्राम गेहूं के चोकर को पानी में डालकर डेढ़-दो घण्टों के लिए रख दें। फिर इसे हाथों में मसलकर फिर से छानकर कुछ देर के लिए ढक कर रख दें जिससे यह गाढ़ा होकर नीचे तली में बैठ जाए। अब पानी को निथार कर अलग कर दें और तली में बैठे गाढ़े सत्त्व में बूरा या चीनी मिला कर भून लें। इसमें पानी मिलाने की आवश्यकता होने पर निथारा हुआ पानी ही मिलाएं, बस चोकर का हलवा तैयार हो जाता है।
  • चोकर की बर्फी – चोकर का लेई-जैसा हलवा घी से चुपड़ी थाली में फैलाकर उस पर छोटी इलायची का चूरा बुरक कर ठण्डा होने के लिए रख दें। ठण्डा होने पर इसे बर्फी के समान टुकड़ों में काट लें।

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