एक्जिमा : कारण, लक्षण और मुक्ति के उपाय

जलन दर्द और खुजली होना एक्जिमा रोग की पहचान है। यूँ तो यह शरीर के किसी भी अंग में हो सकता है, लेकिन आमतौर पर कानों के पीछे, गर्दन पर, हाथ-पैरों की उंगलियों में तथा पैर के निचली ओर अधिक होता है। यह रोग रक्त की खराबी के कारण होती है। एक बार इसके होने पर सही समय पर इलाज ना करवाने से यह तेजी से फैलता है। कुछ स्त्री-पुरुषों में यह बीमारी खाने में लापरवाही और स्वच्छता नहीं रखने से वर्षों तक बनी रहती है। एक्जिमा से होने वाले स्राव को छूने से दूसरे लोगो को भी यह बीमारी हो जाती हैं। इस बीमारी को बड़े पैमाने पर शिशुओं में भी देखा जाता है।

एक्जिमा के कारण : एक्जिमा क्यों होता है ?

  • पाचन क्रिया की खराबी से, अधिक समय तक कब्ज रहने से रक्त दूषित होने पर, स्त्रियों के मासिक धर्म की खराबी के कारण एग्ज़िमा होता है।
  • आधुनिक परिवेश में विभिन्न वस्तुओं से एलर्जी होने के कारण एक्जिमा अधिक होता है। एलर्जिक वस्तुओं का पता नहीं चल पाने के कारण यह रोग तेजी से फैलता है।
  • पोलीस्टर व नायलॉन के सिन्थेटिक के कपड़े और डिटरजेंट के संपर्क में अधिक रहना भी एक्जिमा का कारण बनता है |
  • कुछ लोगो को घड़ी की चेन, जूते, सैंडिल, नेकलेस, नेल पॅलिस, शेविंग क्रीम व दूसरे कॉस्मेटिक से एलर्जी भी एग्ज़िमा का कारण बनता है |
  • सख्त और खुरदरी चीजो से त्वचा का लगातार संपर्क से त्वचा छिल जाती है जो आगे चलकर इस बीमारी का कारण बन जाती है |
  • एग्ज़िमा के अन्य प्रमुख कारणों में त्वचा का अति नाजुक एवं संवेदनशील, रक्त विकार, वंशानुगत, सोरा या शीशा आदि विषैले तत्वों का शरीर में चले जाना आदि होते हैं।

एक्जिमा के लक्षण :

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एक्जिमा के लक्षण

  • लक्षणों में सबसे पहले त्वचा पर तेज जलन होती है और वह स्थान लाल हो जाता है। खुजलाने पर जलन व दर्द होता है, फिर उस जगह पर छोटी-छोटी फुसियां होकर उनमें मवाद (पस) पड़ जाता है। यह मवाद फूट कर जहां-जहां लगता है, वहां-वहां पर फुसियां बढ़ती चली जाती हैं। ऐसे एग्ज़िमा को गीला तथा जब फुंसियो में मवाद नहीं पड़ता, उसे सूखा एग्ज़िमा कहते हैं।
  • जैसे-जैसे रोगी आराम पाने के लिए खुजलाता है, वैसे-वैसे एग्ज़िमा बढ़ता जाता है |
  • ठीक होने पर भी एग्ज़िमा के लक्षण बार-बार प्रकट होते रहते हैं। यह रोग काफी लंबे समय तक रह सकता है।

एक्जिमा का घरेलू उपचार :

  • एक्जिमा के लिए कोई भी उपाय आजमाने से पहले यह जरुर पक्का कर ले की यह एलर्जी तो नहीं है | क्योंकि इन दोनों के लक्षण लगभग एक समान ही दिखते है |
  • एक्जिमा से मुक्ति पाने के लिए कटहल के पत्तों पर घी लगाकर प्रभावित अंग पर बांधे |
  • 10 ग्राम आक का दूध 50 ग्राम सरसों के तेल में पकाकर रखें। इस पेस्ट को प्रभावित अंग पर लगाने से एक्जिमा से मुक्ति मिलती है |
  • अजवायन को पानी में पीसकर प्रभावित अंग पर लगाये कुछ दिनों में एक्जिमा ठीक हो जाता है।
  • मकीय के रस में अंकोल के बीजों को पीसकर लगाने से एक्जिमा के चकत्ते मिट जाते है।
  • प्याज के बीज पीसकर लेप करने से 8-10 सप्ताह में एक्जिमा ठीक होता है।
  • त्रिफला, नीम की छाल और परवल के पत्तों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं। इस काढ़े से प्रभावित अंग को साफ़ करें किसी रूई की सहायता से, इससे इस बीमारी के रोगाणु मर जाते है |
  • प्रभावित अंग को थोड़ा-सा खुजलाकर आम के डंठल से निकले रस को लगायें ।
  • क्षारीय गुण वाले पानी से रोजाना नहाएं। समुद्र स्नान का मौका मिले, तो अवसर न जाने दें।
  • नीम के पत्ते को पानी में उबालकर एक्जिमा प्रभावित अंग को साफ़ करें। फिर उस पर नींबू का रस और तुलसी के पत्ते पीसकर लगाने से लाभ होता है।
  • एक्जिमा का आयुर्वेदिक उपचार : त्रिफला, कुटकी, वच, दारु हल्दी, मजीठ, गिलोय और नीबू की छाल सबको बराबर मात्रा में पीसकर पानी में उबालकर इसका काढ़ा बनाएं | इसको दिन में तीन-चार बार पीने से पुरानी एक्जिमा भी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। आयुर्वेदिक गुदुच्याड़ी तेल लगाने से भी इस बीमारी से मुक्ति मिलती है |
  • एक्जिमा ट्रीटमेंट के लिए नीम के गुलाबी कोमल पत्ते लेकर तेल में काफी देर तक पकाएं। इस तेल को प्रभावित अंग पर लगाने से भी बहुत लाभ होता है।
  • नीम के गुलाबी कोमल पत्तो का रस पीने से भी रक्त की खराबी दूर होती है और दाद, खुजली, फुंसिया भी ठीक होती हैं।
  • नारियल का तेल और कपूर अच्छी तरह मिलाकर लगाएं। कपूर और चन्दन को बराबर मात्रा में लगाने से भी एक्जिमा से मुक्ति मिलती है
  • कुटकी और चिरायता को हल्का-सा गर्म करके प्रभावित अंग को साफ करें।
  • एक्जिमा ट्रीटमेंट के लिए तुलसी के पत्तों के रस में घी-को कांसे के बर्तन में अच्छी तरह घोंटकर लेप करने से एक्जिमा का निवारण होता है। यह भी पढ़ें – एलोवेरा के नुस्खे : दाद, खुजली, घाव, फोड़े-फुंसियों और जली त्वचा के लिए
  • तिल के 1 किलो तेल में कनेर की 250 ग्राम जड़ को जलाकर छान लें। तेल में जड़ को डालकर देर तक उबालने से जड़ जल जाती है। उस तेल को प्रतिदिन प्रभावित अंग पर सुबह-शाम लगाने से एक्जिमा ठीक होता है। तेल को स्वच्छ रुई से लगाना चाहिए।
  • एक्जिमा की दवा : कुटकी और चिरायता 5-5 ग्राम मात्रा में लेकर किसी कांच के बर्तन में भरकर रखें, फिर उसमें 100 ग्राम पानी रात के समय डाल दें। प्रातः उठने पर उस पानी को छानकर पीने से एक्जिमा ठीक होता है। बाकी बचे चिरायता और कुटकी में रात को पानी डालकर रख दें और सुबह उठकर इस पानी को छानकर पी लें इससे खून साफ़ होता है |

एक्जिमा में क्या खाना चाहिए

  • शुद्ध, सादा, शाकाहारी, पौष्टिक भोजन करें।
  • आहार में ज्वार, बाजरा आदि मिले अनाजों की रोटी की प्राथमिकता दें।
  • अंकुरित अनाज में चना, मूंग, मोठ, उड़द, मसूर, सोयाबीन खाएं।
  • कच्ची सब्जी, कच्ची सलाद में पत्ता गोभी, फूल गोभी, टिंडा, तुरई, मूली, गाजर, टमाटर, खीरा, ककड़ी रोजाना 250 ग्राम सेवन करें।
  • नींबू, गाजर, ककड़ी का रस नियमित रूप से पिएं।
  • घी की जगह नारियल का तेल सेवन करें।
  • दूध, दही को इच्छानुसार नियमित लें।
  • सोयाबीन की छाछ रोजाना सेवन करें।

एक्जिमा में क्या नहीं खाना चाहिए

  • एक्जिमा में मांस, मछली, अंडा, तले-भुने आहार, मिर्च-मसालेदार चटपटी खट्टी चीजें न खाएं।
  • मीठी चीजों में चीनी, पेस्ट्री, गुड़, मिठाई, टॉफी का सेवन न करें।
  • चाय, कॉफी, शराब, धूम्रपान, तंबाकू, सॉफ्ट ड्रिक्स से परहेज करें।
  • नमक का सेवन बंद कर दें।
  • डिब्बा बंद भोजन, जौ, जई, सफ़ेद चावल और मैदे का पास्ता, गेहूं के आटे का सेवन करने से बचें।
  • पीड़ित स्थान को नाखून से खुजलाने की बजाय सहलाएं।
  • त्वचा की सफाई औषधि युक्त साबुन से रोजाना करें।

एक्जिमा से बचाव और सावधानियो के लिए टिप्स

  • शारीरिक सफाई की ओर पूरा ध्यान दें।
  • एक्जिमा में ज्यादा गर्म पानी से ना नहाएं |
  • कब्ज न पैदा हो, इसके लिए पेट साफ रखें।
  • परफ्यूम, पाउडर, इत्र या सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करने से पहले एलर्जी टेस्ट जरुर कर लें।
  • ऊनी, नायलोन, पोलीएस्टर के कपड़ें न पहनें।
  • ढीले कपड़े पहनें |यह भी पढ़ें – पतंजलि आयुर्वेदिक दवाइयाँ -सफेद दाग, सोरायसिस, मुहांसे
  • कोशिश करें की अधिक पसीना ना आए |
  • त्वचा में नमी बनाए रखने के लिए माश्‍चराइजर का इस्‍तेमाल करें।
  • एक्जिमा रोगग्रस्त अंग पर धूल, गंदगी जमा न होने दें।
  • अंतरंग वस्त्रों को गंदे या गीले होने पर न पहनें।

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