एंजाइना का घरेलू आयुर्वेदिक उपचार – ह्रदय रोग से मुक्ति पायें

आधुनिक लाइफ स्टाइल में हृदय रोग, कैंसर तेजी से फैल रहे हैं। इनमें बढ़ते हुए प्रदूषण के कारण हृदय रोगों की संख्या सबसे अधिक है। व्यवसाय में रातों-रात सबसे आगे बढ़ जाने की प्रतिस्पर्धा, उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए दिन-रात पढ़ने की विवशता और ऑफिसों में काम करने के कारण उत्पन्न मानसिक तनाव, अनियमित भोजन और आराम तलब जीवन शैली ये सब मिलकर हृदय को सबसे अधिक हानि पहुंचाते हैं जिससे 40 वर्ष की आयु को पार करते-करते स्त्री-पुरुषों को हृदय रोग घेर लेते हैं। दिल के कई रोगों में से एक है एंजाइना रोग जो आगे चलकर ‘हार्ट अटैक” होने का कारण बन जाता है | इस रोग में ह्रदय से जुडी रक्तवाहिका नसों में रुकावट आ जाती है जिससे शरीर में खून का प्रवाह बाधित होकर धीरे धीरे कम होने लगता है परिणाम स्वरूप ह्रदय घात या लकवा जैसे गंभीर रोग हो जाते है |

हृदय शूल (एंजाइना) बीमारी का कारण

  • भोजन में अधिक घी, तेल, मक्खन और अधिक मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने उत्तेजक, चटपटे खाद्य-पदार्थों के सेवन एंजाइना का कारण बनता है ।
  • वसायुक्त खाद्य-पदार्थों से शरीर में कोलेस्ट्रोल की अधिक उत्पत्ति होती है। कोलेस्ट्रोल के रक्त धमनियों में दीवारों के साथ एकत्र होने पर रक्त-संचार में अवरोध होने लगता है। कोलेस्ट्रोल की अधिक उत्पत्ति होने से रक्त-संचार में अधिक अवरोध होता है तो एंजाइना रोग की उत्पत्ति होती है। हृदय को रक्त नहीं मिलने पर एंजाइना अधिक होता है। हृदय में इतना तेज दर्द होता है कि रोगी दर्द के कारण तड़प उठता है।
  • सड़कों पर वाहनों का विषैला धुआं और घरों के आसपास कल-कारखानों की विषैली गैसें वातावरण को प्रदूषित करके, हृदय रोगों से पीड़ित करती है |
  • एंजाइना के लक्षण सिम्पटम्स :- एंजाइना का दर्द शुरू होने से पहले छाती में दर्द की उत्पत्ति होती है। दर्द की लहर बांह, गर्दन से होकर पीठ तक पहुंच जाती है। रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है, फिर हृदय में दर्द होने लगता है।
  • एंजाइना का दर्द दिन में काम करते हुए या रात्रि में बिस्तर पर सोते हुए किसी भी समय हो सकता है। अधिक शराब व सिगरेट पीने वाले व्यक्तियों को यह रोग अधिक होता है।
  • हृदय रोगियों को अधिक शारीरिक श्रम और मानसिक तनाव से बचना चाहिए। सुबह-शाम किसी पार्क में घूमने के लिए अवश्य जाना चाहिए। रोगी को अधिक-से-अधिक ‘तनाव रहित” रहना चाहिए।
  • रक्तचाप की अधिकता भी एंजाइना का कारण बन सकती है। समय-समय पर रक्तचाप का परीक्षण कराकर, चिकित्सा करानी चाहिए। इसके अन्य कारणों की जानकारी के लिए पढ़ें यह आर्टिकल – एनजाइना रोग के कारण, लक्षण तथा आधुनिक उपचार

एंजाइना का घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

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ह्रदय रोग का आयुर्वेदिक उपचार

  • एंजाइना की वजह से यदि हृदय में दर्द और साँस रुकता हुआ अनुभव होने पर लहसुन की दो-तीन कलियों को चबाकर रस चूसने से बहुत लाभ होता है। पेट से गैस निकल जाने पर हृदय का दबाव कम होता है। 3 ग्राम अजवायन का चूर्ण जल के साथ सेवन कराने पर हृदय दर्द शांत होता है।
  • चित्रक, त्रिकुट और पिप्पली मूल 10-10 ग्राम मात्रा में लेकर 500 ग्राम पानी में क्वाथ बनाएं। इस क्वाथ को दिन में दो बार पीने से एंजाइना का दर्द ठीक होता है।
  • गिलोय और काली मिर्च का चूर्ण 10-10 ग्राम मिलाकर, 3 ग्राम मात्रा में हल्के गर्म पानी से सेवन करने से एंजाइना का दर्द ठीक होता है।
  • केले के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर शहद मिलाकर खाने से एंजाइना का रोग होने से बचाव होता है।
  • अकरकरा और अर्जुन की छाल को बराबर की मात्रा में कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर, 3 ग्राम चूर्ण गाय के दूध से पीने पर एंजाइना का रोग ठीक होता है।
  • धमनियों में रुकावट होने से एंजाइना की उत्पत्ति होती है। धमनियों के रूकावट को दूर करने के लिए रोगी को 250 ग्राम पानी में 10 ग्राम शहद और नींबू का रस मिलाकर सेवन करना चाहिए।
  • खस के 10 ग्राम चूर्ण में पीपलामूल का 10 ग्राम चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन 2 ग्राम मात्रा में गाय के दूध के साथ सेवन करने से एंजाइना रोग ठीक होता है।
  • सोंठ के तीन ग्राम चूर्ण में 2 रत्ती श्रृंगभस्म मिलाकर मक्खन के साथ सुबह और शाम सेवन करने से एंजाइना का दर्द ठीक होता है।
  • सोंठ 10 ग्राम को 400 ग्राम पानी में उबालकर क्वाथ बनाएं। 100 ग्राम शेष रह जाने पर क्वाथ को छानकर पीने से एंजाइना से होने वाला हृदय दर्द ठीक होता है।
  • गिलोय और भटकटैया की जड़ दोनों 10-10 ग्राम लेकर 500 ग्राम जल में उबालकर क्वाथ बनाएं। 100 ग्राम शेष रह जाने पर क्वाथ को छानकर सुबह-शाम पीने से एंजाइना रोग से सुरक्षा होती है।
  • पुष्कर मूल को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें। 4 रत्ती चूर्ण मधु मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से एंजाइना की बीमारी ठीक होती है।
  • हिंग्वादि चूर्ण 5 रत्ती मात्रा में जौ का क्वाथ बनाकर सेवन करने से हृदय दर्द ठीक होता है। (हिंग्वादि चूर्ण हींग, बच, विडलवण, सोंठ, पिप्पली कूट, बड़ी हरड़, चित्रक, यवक्षार, काला नमक, पुष्कर मूल सभी औषधियां बराबर मात्रा में पीसकर बनाते हैं। वैसे कैमिस्ट के पास भी बना हुआ मिलता है।

बेल यानि बेलपत्र के एंजाइना रोग में लाभ

  • बेल का मुरब्बा व बेल का शर्बत पिलाने से हृदय रोगी को बहुत लाभ होता है। गर्मियों में धूप में चलने-फिरने या कोई परिश्रम का काम करने से हृदय जोरों से धड़कने पर बेल का शर्बत पीने से बहुत लाभ होता है।
  • बेल के मुरब्बे के साथ 2 ग्राम मात्रा में प्रवाल पिष्टी का सेवन करने से हृदय को अधिक शक्ति मिलती है। बेल का मुरब्बा चांदी का वर्क लगाकर खाने से हृदय को अधिक शक्ति मिलती है। बेल के कोमल, ताजे पत्तों को कूट-पीसकर रस निकाल लें। 7-8 ग्राम रस में श्रृंग भस्म, 3 ग्राम मात्रा में मधु के साथ मिलाकर चाटकर खाने से हृदय रोगों का निवारण होता है।
  • बेल का रस, प्रवाल पिष्टी व शहद मिलाकर चाटकर खाने से एंजाइना रोगियों को बहुत लाभ होता है।
  • बेल के कोमल व ताजे पत्तों के रस में गाय का घी मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने एंजाइना में बहुत लाभ होता है।

एंजाइना के मरीज इन चीजो से परहेज करें

  • एंजाइना के रोगी को घी, तेल, मक्खन आदि से बने खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • शारीरिक श्रम, भारी वजन उठाने और अधिक सीढ़ियां चढ़ने से बचना चाहिए।
  • रोगी को अधिक आराम करना चाहिए।
  • हृदय रोगी की कब्ज के कारण हृदय की धड़कन तेज होने से घबराहट अधिक होती है। कब्ज को ठीक करने के लिए रोगी को प्रतिदिन आंवले का मुरब्बा खाना चाहिए। दूध के साथ गुलकंद खाने से भी कब्ज ठीक होती है |
  • एंजाइना के रोगी को चाय, कॉफी, बीड़ी-सिगरेट, गुटखा, पान मसाले, कोल्ड डिंक, आइसक्रीम और फास्ट फूड का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • एंजाइना से पीड़ित स्त्री-पुरुषों को कम मात्रा में भोजन करना चाहिए, ताकि उस भोजन की पाचन-क्रिया सरलता से हो सके।

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