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वात पित्त कफ का इलाज : त्रिदोष नाशक उपाय

आयुर्वेद के अनुसार प्रत्येक बीमारी त्रिदोष के असंतुलन से पैदा होती है इसलिए आयुर्वेदिक उपचार में मुख्य उद्देश्य वात पित्त कफ के इलाज द्वारा दिमाग तथा शरीर को संतुलित अवस्था में वापस लाना होता है। शरीर की पूरी प्रक्रिया दिमाग द्वारा नियंत्रित होती है | यह निम्नलिखित क्रियाओं को नियंत्रित तथा नियमित करता है- भूख,

कफ विकार के कारण और लक्षण – त्रिदोष

आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर पृथ्वी, जल, सूर्य, वायु तथा आकाश से बना है और इन पांचों के असंतुलन होने से ही दोषों की उत्पति भी होती है। वायु और आकाश से वात, तेज और पित्त तथा पृथ्वी और जल के योग से कफ की उत्पत्ति होती है। वायु, पित्त और कफ भी शरीर को

पित्त विकार के कारण और लक्षण – त्रिदोष

पित्त हमारे शरीर में पीले रंग का द्रव है जो पाचन में सहायक होता है तथा इसका संबंध शरीर की गर्मी से है। पित्त एक प्रकार का पाचक रस होता है | पित्तनलिका जिगर से निकलकर जहां पर आंत में मिलती है | पित्त धातू शरीर में होने वाले किसी भी इन्फेक्शन से भी शरीर

वात रोग के कारण, लक्षण और क्या है वात विकार

हमने पिछले पोस्ट में बताया था की आयुर्वेद के अनुसार किसी व्यक्ति में होने वाले सभी रोगों का प्रमुख कारण वात, पित्त और कफ होता है तथा इनमे से सबसे मुख्य और बड़ा कारण “वात” को माना गया है अर्थात वायु | इस पोस्ट में हम वात असंतुलित होने पर क्या लक्षण उभरते है और

जानिए क्या है आयुर्वेद के अनुसार वात, पित्त और कफ दोष

( वात, पित्त और कफ ) -आज हम आपको आयुर्वेद के सिद्धांत के अनुसार एक स्वस्थ्य जीवन पाने के तरीके के बारे में बतायेंगे | हमारी कोशिश होगी की ये जानकारी आपको सरल और आम बोलचाल की भाषा में समझा सके ताकि आप इस जानकारी को व्यवहारिक रूप से अपने जीवन में उतार सके और