ब्रेस्ट बढ़ाने के टिप्स-Breast Growth & Care

स्त्री सौंदर्य में ब्रेस्ट यानि स्तनों का विशेष महत्व है। सुंदर नारी भी उन्नत स्तनों के अभाव में सुंदर नहीं कही जा सकती। उन्नत स्तनों वाली स्त्री विशेष रूप से आकर्षक दिखती है। शादी से पूर्व अथवा शादी के बाद भी कुछ महिलाओं को स्तनों के आकार से परेशानी रहती है। ब्रेस्ट पूर्ण विकसित न होने से या ब्रेस्ट छोटे-बड़े होने से हीन-भावना घर कर जाती है। किसी भी महिला के लिए यह उलझनपूर्ण स्थिति हो सकती है।

आधुनिक चिकित्सकों के अनुसार स्तनों का छोटा या बड़ा होना साधारणत: शारीरिक बनावट के कारण होता है। वक्ष में आकर्षण लाने के लिए प्रारम्भ से ही इनकी देखभाल करनी चाहिए। बारह से चौदह वर्ष की आयु के दौरान किशोर युवतियों में तेजी से परिवर्तन आने लगते हैं। इस परिर्वतन के साथ उनके वक्ष में उभार प्रकट होने लगता है। चौदह से अठारह वर्ष की आयु तक वक्ष का पूर्ण विकास हो जाता है। इस आयु के दौरान वक्ष का पूर्ण विकास नहीं होने के अनेक कारण हैं, जैसे शरीर में हारमोंस की गड़बड़ी, आनुवंशिकता और शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी।

गोल, कठोर एवं पूर्ण विकसित ब्रेस्ट आदर्श ब्रेस्ट कहे जाते हैं, जिन पर प्रत्येक स्त्री गर्व कर सकती है। उचित देखभाल के अभाव में कई बार ब्रेस्ट बहुत छोटे रह जाते हैं या बहुत मोटे हो जाते हैं और लटक भी जाते हैं, जोकि स्त्री के सौंदर्य को नष्ट करके उसमें हीन भावना उत्पन्न करते हैं। कई बार लम्बी बीमारी, अनियमित मासिक-धर्म, प्रसव-उपरान्त और गर्भावस्था के दौरान वक्ष ढलकर बेडौल होने लगता है। ब्रेस्ट बढ़ाने का आयल, ब्रेस्ट बढ़ाने की दवा, ब्रेस्ट मसाज तेल , ब्रेस्ट क्रीम या आयुर्वेदिक दवा बेचने वाली कंपनियां दावे जरूर करती रहती हैं कि उन की दवा या तेल में स्तनों को बढ़ाने की क्षमता है, लेकिन ज्यादातर लोगो को निराशा ही हाथ लगती है, क्योंकि सिर्फ उपरी तौर पर कोई क्रीम या तेल लगाने से स्तनों का आकार कैसे बढ़ सकता है ? तेल या क्रीम से नसे और मसल्स तो खुल सकती है परंतु उससे स्तनों का फैट तो नही बन सकता है |  इसके लिए आपको लंबे समय तक कई उपाय आजमाने पड़ेंगे, जैसे सबसे जरुरी है खानपान , फिर व्यायाम, इसके बाद मालिश और अंत में वो जरुरी सावधानियां जिनका ख्याल रखकर आप अपने ब्रेस्ट को हमेशा आकर्षक बनाए रख सकती है |  विभिन्न प्रकार के स्तनों को सही आकार में रखने में निम्न उपाय अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे |

ब्रेस्ट बढ़ाने के उपाय : 

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Breast Size Increase Tips & Breast Care

  • स्तनों पर हल्के हाथों से नीचे से ऊपर की ओर जैतून के तेल की मालिश करें।
  • कुछ इस तरह के व्यायाम करें जिनमें हाथों का उपयोग अधिक हो।
  • गहरी सांस लेकर अंदर रोकें और धीरे-धीरे छोड़ें। ऐसा कई बार करें।
  • छोटे वक्ष पर नरिशिंग क्रीम द्वारा मालिश करने से धीरे-धीरे छोटा वक्ष सही आकार में आ जाता है।
  • होमियोपैथी की सेबेल सेरुलाटा व सारसोपरिला दवा मूल अर्क में व अक्स मास्चेटा दवा 30 शक्ति में कुछ दिन लेने से फायदा मिलता है।
  • सेबेल सेरुलाटा व सारसोपेरिला मूल अर्क की सीधे ही स्तनों पर मालिश अथवा जैतून के तेल में मिलाकर धीरे-धीरे स्तनों की मालिश कराई जानी चाहिए अथवा स्वयं करनी चाहिए।
  • ब्रेस्ट बड़ा करने के लिए जैतून के तेल से वक्ष की हर रोज मालिश करनी चाहिए मालिश स्नान करने से पहले गोलाइयों में नीचे से ऊपर की और कम से कम पन्द्रह मिनट करें। मालिश करने के बाद ठण्डे पानी से स्नान करने से वक्ष की माँसपेशियों में रक्त-संचार तीव्र गति से होने के कारण वक्ष विकसित होने लगते हैं।
  • मेथी के सेवन से स्तनों में उभार आता है। स्तनों को बढ़ाने के लिए दानामेथी की सब्जी खायें तथा दानामेथी में पानी डालकर पीसकर, पेस्ट बनाकर स्तनों पर मालिश करें।
  • कसे हुए स्तनों के लिए अनार के छिलके पीसकर रात को स्तनो पर लेप करके सोयें प्रात: धोएं। कुछ सप्ताह यह प्रयोग करने से ब्रेस्ट का ढीलापन दूर होगा।
  • ठंड के मौसम में पारदर्शी शीशे के सामने (खिड़की के शीशे के पीछे, जहाँ से धूप आती हो) वक्षों को खोलकर धूप में सेंक लेना चाहिए। इस प्रकार की सिकाई के साथ ही अपने हाथ की अंगुलियों से वक्षों की सूखी मालिश करनी चाहिए। ब्रेस्ट की मालिश के समय ही यह जांच भी हो सकती है कि कहीं कोई गांठ वगैरह तो नहीं है। यदि ऐसा प्रतीत हो तो तुरंत लेडी डाक्टर से जाँच कराई जानी चाहिए।
  • धूप सेंकने के 15 मिनट बाद ही स्नान करें। तुरंत स्नान करना पड़े तो हल्के गुनगुने पानी से स्नान करें।
  • हाथ की उंगलियों से ब्रेस्ट की गोलाई में तेल की मालिश करें।
  • ब्रेस्ट के सही विकास के लिए शुरू से ही सही आकार की कसी हुई ब्रेसियर पहननी चाहिए अन्यथा वक्ष झूलने का डर रहता है, ब्रेसियर का आवश्यकता से अधिक कसाव भी स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं। इससे वक्ष-कैंसर तक होने की आशंका रहती है। युवतियों को तैरना, रस्सी कूदना, बैडमिण्टन अथवा टेबल-टेनिस खेलना, झूलना और घुड़सवारी करनी चाहिए।
  • भोजन में प्रोटीन, कार्बो-हाइड्रेट्स, चिकनाई, विटामिन, कैल्शियम, लौह-तत्व और लवण पर्याप्त मात्रा में होने चाहिए।
  • Estrogen से भरपूर मात्रा वाले खाने का सेवन करें इसके लिए आप चिकन सूप, सौंफ के बीज, सोयाबीन, अंडे, फल, हरी सब्जियां, सूरजमुखी के बीज, तील और अलसी का सेवन करें |
  • ब्रेस्ट का आकार बढ़ाने के लिए एस्ट्रोजन की गोलियाँ या एस्ट्रोजन की खुराक लेने से बचें |

ब्रेस्ट बढ़ाने और वक्ष स्थल के सौंदर्य के लिए सावधानियां अपनाई जानी चाहिए | Breast Care Tips

  • बहुत अधिक ठंडे या बहुत गरम पानी से ब्रेस्ट को कभी नहीं धोना चाहिए।
  • स्तनों को जोर से नही दबाना चाहिए |
  • लड़कियां मासिक धर्म शुरू होते ही उचित नाप की ब्रा पहनना शुरू कर दें।
  • स्तनों को खींचकर बच्चे को दूध न पिलाएं।
  • मालिश हमेशा हल्के हाथ से नीचे से ऊपर की ओर करें। नीचे की ओर मालिश करने से ब्रेस्ट लटक जाते हैं।
  • ज्यादा कसी, ढीली, नायलान युक्त आदि ब्रा न पहनें। सही नं० की ब्रा ही प्रयोग करें।
  • रात को सोते समय ब्रा उतार कर सोएं और सुबह उठते ही अवश्य पहन लें।
  • शिशु को ब्रेस्ट-पान कराने वाली महिलाओं को अपने वक्षस्थल की विशेष देखभाल करनी चाहिए। गलत ढंग से ब्रेस्टपान कराने वाली महिलाओं के वक्ष बेडौल होने लगते हैं। स्वयं लेट कर अथवा शिशु को गोद में लिटा कर ब्रेस्ट पान कराने से वक्ष झूलने लगते हैं। हमेशा स्वयं बैठकर और बच्चे को गोद में लिटा कर दूध पिलाना चाहिए। बच्चे का सिर स्थिर रहे। दूध पिलाने के तुरन्त बाद वक्ष के अग्रिम भाग को उँगलियों में भींच कर तीन-चार बार झटके से हिलायें, ताकि वक्ष में बचा-खुचा दूध बाहर रिस आये। इससे ब्रेस्ट में ताजगी और हल्कापन आ जाता है।
  • बच्चों को अपना दूध अवश्य पिलाएं, इससे ब्रेस्ट सही आकार में रहते हैं।
  • शारीरिक कमजोरी होने पर पौष्टिक आहार लें। फलों एवं दूध का सेवन करें ।
  • ब्रेस्ट पूर्णतया विकसित नहीं होने के कारण कृत्रिम रूप से वक्ष-फैलाव के लिए स्त्रियाँ मोटे पैड वाली ब्रा पहनने लगती हैं। मोटी सिन्थेटिक व नाइलोन की बनी पैड वाली ब्रा पहनने से ब्रेस्ट के ग्रन्थीय ऊतक अत्यधिक गरम हो जाते हैं और इससे कैंसर-पल्स उत्पन्न होने लगता है।
  • अधिक कसी हुई ब्रा पहनने से भी गरमी उत्पन्न होती है। रात के समय महिलाओं को ब्रेसियर उतार कर सोना चाहिए।
  • आम तौर पर विवाहिता स्त्रियों में एक वक्ष दूसरे वक्ष की अपेक्षा बड़ा होने की समस्या देखी गयी है। इसका प्रमुख कारण होता है, शिशु का एक ही तरफ का ब्रेस्ट पान करना। कई बार अविवाहिता युवतियों में भी यह समस्या देखी गयी है। इसके लिए चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं।
  • कुछ स्त्रियों को बोझिल ब्रेस्ट के कारण परेशान देखा गया है। ब्रेस्ट बोझिल होने के कारण यह झूलने लगते हैं और इनमें हल्की-हल्की पीड़ा होती है।
  • ब्रेस्ट अधिक फैले हुए हों, तो मुलायम गोल कप वाली ब्रा पहनें। ऐसी हालत में लो-कट चोली अथवा ब्लाउज नहीं पहनना चाहिए।
  • अचानक ही वजन का कम होना (डायटिंग या किसी अन्य बीमारी के कारण) स्तनों पर एकत्रित वसा को घोल देता है, जिस कारण वे लटक जाते हैं।
  • स्तनों की मालिश तेज-तेज़ नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से ब्रेस्ट लटक सकते हैं। पढ़ें यह भी – मसाज के लाभ, विधि और सावधानियां
  • ब्रेस्ट यौन आकर्षण का भी केंद्र बिंदु माने गए हैं, मगर इसके लिए जरूरी नहीं कि ब्रेस्ट बड़े-बड़े ही हों, यह महज एक भ्रांति है। छोटे मगर दृढ़ व सुडौल स्तनों वाली महिला भी आकर्षक दिख सकती है, जरूरी है सही ‘पोस्चर’ का अपनाया जाना। यदि आप सिर उठाकर, तनकर चलेंगी, तब चाहे ब्रेस्ट छोटे ही क्यों न हों आप आकर्षक लगेंगी।

ब्रेस्ट बढ़ाने के लिए व्यायाम

  • बच्चा होने के बाद ब्रेस्ट -सौन्दर्य के लिए सर्वाधिक देखभाल करनी पड़ती है। इस अवस्था में सरल व्यायाम अवश्य करने चाहिए। वक्ष-सौन्दर्य के लिए ‘पाम प्रेसिंग” एक सरल व्यायाम है। घुटनों के बल बैठ कर हाथों को सामने लाते हुए दोनों हाथों की हथेलियाँ परस्पर पूरे बल से दबाइए, जिससे वक्ष की माँसपेशियों पर दबाव महसूस हो। फिर धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए हथेलियाँ ढीली कर दें। इस व्यायाम को नित्य लगभग दस-पन्द्रह बार दोहराना चाहिए। वक्ष को पुष्ट रखने के लिए एक अन्य सरल व्यायाम इस प्रकार है- दोनों हाथ सामने फैलाते हुए हथेलियों से दीवार पर लगभग पाँच मिनट दबाब डालें, जिससे ब्रेस्ट की शिराओं पर खिंचाव महसूस होने लगे।
  • प्रतिदिन लगभग पाँच से दस मिनट तक वक्षस्थल को गरम व ठण्ड स्नान कराने से वक्ष में रक्त-प्रवाह तीव्र होने लगता है। पहले वक्षस्थल पर गरम पानी डालें, फिर ठण्डे पानी के छींटे मारें। इस क्रिया को चार-पाँच बार दुहराएँ। ब्रेस्ट पुष्ट बनाये रखने के लिए एक सरल व्यायाम इस प्रकार है। बाँहें कमर के साथ सीधी रखते हुए सीधी खड़ी हो जायें। बारी-बारी बाँहों के दोनों ओर सिर के ऊपर ले जाते हुए लगभग दस से पन्द्रह बार घुमायें। यह भी पढ़े – जाने क्या है प्राणायाम? तथा प्राणायाम करने के लाभ |
  • ब्रेस्ट बढ़ाने के लिए एक व्यायाम इस प्रकार है- छोटे वक्ष वाली भुजा सामने की ओर फैलाते हुए सिर के ऊपर से ले जाकर लगभग दस बार घुमायें, फिर विपरीत दिशा में लगभग दस बार दुहरा कर व्यायाम पूरा कीजिए।
  • योगासनों द्वारा ब्रेस्ट -सौन्दर्य विशेष रूप से भुजंगासन द्वारा ब्रेस्ट की सुन्दरता बढ़ायी जा सकती है।

ब्रेस्ट बढ़ाने के लिए ब्रेस्ट इम्प्लांटेशन

  • अगर आप सभी उपाय आजमा चुकी है पर अच्छे परिणाम नहीं मिलते है तो निराश ना हो आप सीधे कॉस्मेटिक सर्जन के पास जाकर Breast Implant Surgery द्वारा अपने वक्षस्थल को सही शेप में ला सकती हैं।
  • ब्रेस्ट सर्जरी 2 प्रकार की होती है- रिडक्शन मेमोप्लास्टी जिसके तहत बड़े स्तनों को छोटा किया जाता है और ऑगमेंटेशन मेमोप्लास्टी जिसके तहत स्तनों को बड़ा किया जाता है।
  • रिडक्शन मेमोप्लास्टी : ब्रेस्ट को छोटा करते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि मिल्क डॉट्स खराब न हों, यह ज्यादातर युवा या अविवाहिताओं के लिए है। यदि महिला बड़ी उम्र की है तो स्तनों की सर्जरी से पहले निप्पल उतार दिए जाते हैं, फिर सर्जरी के बाद सही जगह दोबारा ड्राफ्ट कर दिए जाते हैं। इसके बाद मिल्क डॉट्स काम नहीं करते।
  • मेस्टोपैक्सी सर्जरी : यह सर्जरी तब की जाती है, जब ब्रेस्ट काफी लंबे या लटके हुए होते हैं, इसमें ब्रेस्ट के टिश्यू को टाइट करके त्वचा के साथ टाइट कर दिया जाता है। जानिए क्या है Aromatherapy और घर पर इसे कैसे करते हैं ?
  • लाइपोसक्शन द्वारा ब्रेस्ट छोटे करने के लिए स्तनों की चर्बी को पिघलाकर बाहर निकाला जाता है
  • स्तनों को बड़ा बनाना : महिला के डीलडौल के अनुसार उसके स्तनों को तीन प्रकार से बड़ा किया जाता है। शरीर के किसी भाग की चर्बी स्तनों में भर दी जाती है।
  • सलाइन से इसमें गुब्बारे के समान वाले पदार्थ में पानी भरकर स्तनों में डाला जाता है।
  • सिलीकॉन जैल फिल्ड को स्तनों में रोप दिया जाता है। यह तरीका पहले 2 तरीकों से ज्यादा उत्तम है।
  • ब्रेस्ट में मेडिकेटेड सिलीकॉन जैल डालने से किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं होती। इसे ब्रेस्ट में इम्प्लाट करने के बाद बच्चों को फीड कराने में कोई दिक्कत नहीं होती।
  • धंसे हुए निप्पल : यदि निप्पल धंसे हुए हों तो एक्शन मशीन की निप्पल में लगाकर खींचा जाता है। नियमित रूप से ऐसा करने पर निप्पल ठीक हो जाते हैं।

ब्रा कब पहने ?

सामान्य तौर पर लड़कियों में 12 से 14 वर्ष की आयु तक उनके वक्षस्थल पर उभार आना शुरू हो जाता है और वृद्धि की यह प्रक्रिया 14 से 18 वर्ष तक की आयु के दौरान निरंतर होती रहती है। इस दौरान यदि स्तनों की सही देखभाल पर ध्यान न दिया जाए, तो इनका आकार बिगड़ सकता है। वक्ष का विकास प्रारंभ होते ही ब्रा न पहने, क्योंकि बढ़ रहे वक्ष पर ब्रा के बंधन से बाद में उनमें शिशुओं के लिए दूध की कमी हो सकती है। वैज्ञानिकों ने 17 वर्ष की किशोरियों को ‘ब्रा ‘ पहनने की मनाही की है।

ब्रा कैसे पहनें?

  • सूती और सस्ते कपड़ों से बनी सादी ब्रा, जो हलकी होती है, इनसे स्तनों का तापक्रम नहीं बढ़ता है
  • तरह-तरह की आकर्षक डिजाइनों की कलात्मक गर्म, मोटी, फोम युक्त, नायलोन आदि कृत्रिम रेशों से बनी सिंथेटिक, अधिक कसी हुई ताकि स्तनों का उभार स्पष्ट दिखाई दे, ऐसी ब्रा लाभ के स्थान पर हानि पहुंचाती है।
  • अत्यधिक कसी, मोटी और कृत्रिम रेशों की सिंथेटिक निर्मित ब्रा पहनने से स्तनों के ऊतक आवश्यकता से अधिक गर्म हो जाते हैं, जिससे वक्ष का कैंसर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। जो स्त्रियां नायलान आदि गर्म किस्म की ‘ब्रा ‘ कस कर बांधती हैं, उनके स्तनों में कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है, जबकि सूती व सामान्य किस्म की उचित प्रकार से पहनी गई ब्रा स्तनों को ज्यादा गर्माहट नहीं पहुंचाती करती, जिससे कैंसर की संभावना घट जाती है।
  • ब्रा के चुनाव व पहनने में यदि कुछ सावधानियां बरती जाएं, तो संभावित दुष्परिणामों से बचा जा सकता है।
  • ये सावधानियां इस प्रकार से हैं:- स्तन स्त्री शरीर का अत्यंत कोमल अंग होता है, अत: ब्रा ऐसी ही पहनें, जो आरामदायक हो और स्तनों को सहारा देकर आकर्षण पैदा करे।
  • हर स्त्री को अपने नाप की सही फिटिंग वाली ब्रा ही पहननी चाहिए। वह न तो अधिक ढीली हो और न ही अधिक कसी हुई हो।
  • नायलोन फोम, मोटी सिंथेटिक वाली ब्रा न पहनें, जिससे कि आपके स्तनों को अधिक गर्मी, कसाव व तनाव मालूम पड़े। यदि किसी कारणवश पहनना ही पड़े, तो कुछ घंटों के बाद उतार दें।
  • सोते समय स्तनों को ढीला छोड़ें, ब्रा न पहनें।
  • जहां तक हो सके, ब्रा हमेशा सूती, नर्म कपड़े की बनी हुई ही पहनें, ताकि उसमें पसीना सोखने की उचित क्षमता हो। इससे स्तनों की शीतलता कायम रहेगी ।
  • गर्भवती व प्रसूता महिलाओं के लिए उपलब्ध मैटरनिटी ब्रा का उपयोग करें और इस दौरान स्तनों में हुई 7 से 10 सेंटीमीटर तक की वृद्धि के हिसाब से नई ब्रा खरीदें, पुराने वाली ब्रा पहनने की कोशिश न करें, अन्यथा स्तनों को नुकसान पहुंच सकता है।

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