ब्राह्मी के औषधीय गुण, घरेलू नुस्खे तथा ब्राह्मी का सेवन कैसे करें

ब्राह्मी का पौधा हिमालय की तराइयों में बहुतायत में मिलता है, जो बहुत अच्छी किस्म का होता है। यूँ तो ब्राह्मी सारे भारत में गीली तर भूमि या जलाशय के किनारों पर आमतौर पर पाई जाती है। ब्राह्मी एक औषधीय पौधा है। इसके पत्ते, फूल,फल, बीज और जड़ औषधि के रूप में उपयोग किए जाते हैं। इसे ब्रेन बूस्टर के नाम से भी जाना जाता है। ब्राह्मी एक प्रकार का नर्वटानिक माना जाता है जो दिमाग को शांति तथा ठंडक देती है इसके अलावा यह स्नायु कोषों का पोषण भी करती है, ताकि हमें स्फूर्ति का अनुभव मिले। यह मस्तिष्क विकार को दूर करने, बढ़े हुए ब्लड प्रेशर को घटाने, अनिद्रा रोग दूर करने में एक कामयाब औषधि है। ब्राह्मी का प्रभाव मुख्यत: मस्तिष्क पर पड़ता है। यह मस्तिष्क के लिए टॉनिक है ही, उसे शान्ति भी देती है। दिमागी थकान से जब व्यक्ति की काम करने की क्षमता घट जाती है तो ब्राह्मी के गुण स्नायुकोषों का पोषण कर उन्हें उत्तेजित करते हैं तथा व्यक्ति को नई स्फूर्ति का अनुभव होता है। ब्राह्मी को दर्द निवारक के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसमें पाया जाने वाला एंटीनोसिसेप्टिव के कारण ब्राह्मी को न्यूरोपैथिक दर्द की स्थिति में इलाज के रूप में इस्तेमाल होता है | ब्राह्मी की तासीर ठंडी होती है |

विभिन्न भाषाओं में नाम

  • संस्कृत- कपोतवंका, सोमवल्ली। हिंदी, मराठी, गुजराती-ब्राह्मी। बंगाली-ब्राह्मी शाक, थुलकुडी। अंग्रेज़ी-बकोपा मोनिएरा (Bacopa monniera)। लैटिन-सेण्टेला एशियाटिका (Centella Asiatica)।

आयुर्वेदिक ग्रंथो के अनुसार ब्राह्मी स्वाद में कसैली, तिक्त, मधुर गुण में हलकी, तासीर में ठंडी, विपाक में मधुर, रसायन, स्वरशोधक, बलवर्द्धक, त्रिदोष नाशक, हृदय को बल देने वाली, आयु और स्मृतिवर्द्धक, मूत्रल, स्तन-दुग्धवर्द्धक, मस्तिष्क को शांति देने वाली होती है। यह रक्त विकार, बुखार, उन्माद, अतिसार, पीलिया, हिस्टीरिया, मिर्गी, नाड़ी दौर्बल्यता, स्मृतिनाश, प्रमेह, खांसी, सूजन, कोढ़, उच्च रक्तचाप में गुणकारी है। महर्षि चरक ने ब्राह्मी को कई रोगों की एक अचूक औषधि बताया है। बच्चो की जन्मजात तुतलाहट में भी ब्राह्मी बहुत फायदेमंद होती है।

वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार इसमें ब्राह्मीन (Bramhine) नामक एल्केलाइड 0.01 से 0. 02 प्रतिशत पाया जाता है, जिसके प्रभाव से स्नायतन्त्र उत्तेजित होता है। इसके अलावा अल्प मात्रा में सेपोनिन, हरपेस्टिन, बोटूलिक अम्ल, स्टिग्मा स्टेनॉल, डी-मैनिटाल, बीटा-साइटोस्टीराल, सेण्टोइक एसिड, सेण्टेलिक एसिड. स्टीग्मास्टीरॉल, टैनिन, ग्लूकोसाइड, एसियाटिक एसिड और उड़नशील तेल भी पाए जाते हैं।

ब्राह्मी के बेहतरीन घरेलू नुस्खे

ब्राह्मी के औषधीय गुण, घरेलू नुस्खे ब्राह्मी का सेवन कैसे करें brahmi ke fayde gun nuskhe pehchan

  • उच्च रक्तचाप में : ब्राह्मी के पत्तों का रस एक चम्मच की मात्रा में आधे चम्मच शहद के साथ दिन में 3 बार कुछ दिन नियमित रूप से सेवन करने से उच्च रक्तचाप सामान्य हो जाएगा।
  • शरीर में जलन होने पर : 5 ग्राम ब्राह्मी के साथ धनिया मिलाकर रात भर भिगो दें। सुबह पीस, छानकर मिश्री मिलाकर पीयें बहुत जल्दी ही शरीर की जलन से मुक्ति मिलेगी।
  • ब्लड प्रेशर ज्यादा होने पर : ब्राह्मी के पत्तों का रस एक चम्मच की मात्रा में आधे चम्मच शहद के साथ सेवन करने से उच्च रक्तचाप सामान्य हो जाता है।
  • बालों में डैंड्रफ या फिर खुजली की समस्या भी ब्राह्मी के प्रयोग से ठीक हो सकती है। इसमें मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स शरीर से जहरीले पदार्थो को बाहर निकालने का काम करते हैं।
  • बाल झड़ने पर : ब्राह्मी पंचांग का पाउडर एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से कुछ हफ्ते सेवन करें। यही प्रयोग शारीरिक कमजोरी दूर करने में भी फायदेमंद होता है।
  • श्वेत प्रदर रोग में : ब्राह्मी पंचाग का पाउडर 2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ दिन में 3 बार नियमित सेवन करें।
  • पेशाब की रुकावट में : ब्राह्मी का रस 2 चम्मच में एक चम्मच मिश्री मिलाकर सेवन करें।
  • रक्त विकार : तुलसी की पत्तियों और ब्राह्मी की पत्तियों का रस एक समान मात्रा मिलाकर त्वचा रोग जैसे-दाद, खाज, खुजली पर लगाएं।
  • 5 ग्रा. ब्राह्मी और 2 ग्रा. कूठ के चूर्ण को 10 ग्रा. शहद में मिलाकर लेने से उदासी व बेचैनी से राहत मिलेगी ।
  • खांसी और गला बैठने पर : एक चम्मच ब्राह्मी पत्ते के रस में 2 काली मिर्च और आधा चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से खांसी में आराम मिलेगा।
  • बुखार में : ब्राह्मी पंचांग और तुलसी के सूखे पत्तों का पाउडर समान मात्रा मिलाकर पीस लें। फिर इसमें एक चौथाई पाउडर काली मिर्च का मिलाएं। तैयार पाउडर की एक चम्मच मात्रा दिन में 3-4 बार शहद के साथ दें। बुखार ठीक हो जाएगा।
  • यदि आप गायक है तो गले और आवाज को सुरीला बनाने के लिए ये नुस्खा आजमायें – सूखी ब्राह्मी 100 ग्राम, मुनक्का 100 ग्राम, शंखपुष्पी 50 ग्राम, इन सब को दो गिलास पानी में मिलाकर अर्क निकालें। इसके प्रयोग से शरीर स्वस्थ और आवाज साफ हो जाती है।

स्मरण शक्ति (याददाश्त) बढ़ाने के लिए ब्राह्मी :

  • सूखी ब्राह्मी 1 भाग, बादाम गिरी 1 भाग, काली मिर्च चौथाई भाग पानी में पीसकर 3-3 ग्राम की टिकिया बनायें। दिमाग में तरावट के लिए एक टिकिया रोजाना सुबह शाम दूध के साथ लें।
  • ब्राह्मी 3 ग्राम, शंखपुष्पी 3 ग्राम, बादाम गिरी 6 ग्राम, छोटी इलायची के बीज 3 ग्राम, इन सभी को एक चमच्च पानी में पीसकर मिश्री मिला कर खाएं। स्मरण शक्ति के साथ-साथ यह योग खांसी, पित्त बुखार के लिए बहुत लाभदायक है।
  • ब्राह्मी का ताजा रस लेकर, उसमें समान मात्रा में घी मिलाकर रख लें, इस घी को 5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से याद रखने की क्षमता बढ़ती है। इसके पंचांग का पाउडर दूध में मिलाकर सेवन करने से भी स्मरण शक्ति बढती है।
  • याददाश्त बढ़ाने के लिए : ब्राह्मी की पत्तियों का 2 ग्राम पाउडर 3-4 काली मिर्च के साथ पीसकर सुबह-शाम रोजाना एक कप दूध के साथ सेवन करने से याददाश्त बढ़ेगी।

अच्छी नींद पाने के लिए ब्राह्मी का ऐसे करें उपयोग  

  • ब्राह्मी का 3 ग्राम का पाउडर गाय के आधा किलो कच्चे दूध में अच्छी तरह से मिलाकर छानकर एक सप्ताह तक सेवन करने से नींद ना आने की समस्या छुटकारा मिल जाता है।
  • ताजी ब्राह्मी 5-10 ग्राम रस को 100-150 ग्राम कच्चे दूध में मिलाकर पीने से लाभ होता है। ताजी ब्राह्मी ना मिले तो लगभग 5 ग्राम ब्राह्मी  पाउडर का प्रयोग कर सकते है।
  • ब्राह्मी और शंखपुष्पी का सूखा पाउडर समान मात्रा में मिलाकर एक चम्मच की मात्रा में सोने से पहले एक कप दूध के साथ रोजाना सेवन करें और ब्राह्मी तेल को सिर के बालों की जड़ों में मलकर लगाएं। अच्छी नींद आ जाएगी।

दिमाग (मस्तिष्क) रोगों में 

  • मस्तिष्क की कमजोरी में : ब्राह्मी का सूखा पाउडर और बादाम की गिरी 50-50 ग्राम लेकर 15 ग्राम काली मिर्च मिलाकर पीस लें। एक चम्मच की मात्रा में एक कप दूध के साथ रोजाना नियमित रूप से सेवन करने और बालों की जड़ों में बाह्मी तेल की मालिश करते रहने से मस्तिष्क की कमजोरी, भूलने की बीमारी दूर हो जाएगी |
  • ब्राह्मी तीन ग्राम, कुछ दाने काली मिर्च के साथ पानी में पीसकर दिन में 3-4 बार पिलाने से पुराने सिरदर्द में आराम मिलता है।
  • मिर्गी के दौरों में ब्राह्मी स्वरस 72 चम्मच शहद के साथ (अथवा चूर्ण) दिया जाता है । 3-5 ग्राम तक एक बार में देना चाहिए।
  • एक किलो नारियल के तेल में 15 तोला ब्राह्मी स्वरस मिलाकर उबाल लें । ब्राह्मी तेल तैयार है । इसकी मालिश करने से दिमागी कमजोरी व सिर की खुश्की दूर होती है |
  • ब्राह्मी का रस 6 ग्राम, कूठ का पाउडर डेढ़ ग्राम, शहद 6 ग्राम मिलाकर रोगी को दिन में तीन बार पिलायें, यह उन्माद मिटाने के लिए लाभप्रद है।
  • ब्राह्मी रस में कुठ पाउडर तथा शहद को मिलाकर चाटने से उन्माद रोग ठीक होता है।
  • ब्राही की पत्तियों का रस तथा बालवच, कूठ, शंखपुष्पी इनके कल्क के साथ गाय के पुराने घी के साथ सेवन करें। यह उन्माद, अपस्मार जैसे रोगों में मरीज को बहुत आराम मिलता है |

कितनी मात्रा में सेवन करना चाहिए

  • ब्राह्मी पत्तों का रस । से 3 चम्मच (5 से 15 मिलीलीटर)। ताजी हरी पत्तियां 10 से 15 तक। सुखाया हुआ पाउडर 1 से 2 ग्राम। पंचांग पाउडर 3 से 5 ग्राम। जड़ का पाउडर आधा से डेढ़ ग्राम।
  • ताजी ब्राह्मी का पंचांग ही अधिक उपयोगी होता है। इसलिए इसी का प्रयोग करें |

ब्राह्मी का पौधा कैसा होता है ?

  • ब्राह्मी के पौधे का तना जमीन पर फैलता जाता है, जिसके जोड़ों से जड़, पत्तियां, फूल और बाद में फल लगते हैं। इसकी मांसल, चिकनी, वृक्काकार, कुछ गोल, 7-8 शिराओं से युक्त पत्तियां एक इंच लंबी और 10 मिलीमीटर तक चौड़ी होती हैं।
  • पत्तियां स्वाद में कड़वी और छोटे छोटे काले दागो से भरी होती हैं। फूल छोटे, सफेद, नीले या गुलाबी रंग के लगते हैं।
  • फलों का आकार गोल, लंबाई लिए, आगे से नुकीला होता है, जिसमें छोटे-छोटे पीले बीज निकलते हैं।
  • इसकी जड़ें छोटी और धागे की तरह पतली होती हैं। फूलो की बहार गर्मियों में आती है, उसी के बाद फल लगते हैं।
  • ब्राह्मी का सुखाया हुआ पंचांग (पत्ते, फूल, फल, बीज और जड़) पंसारियों की दुकान पर आसानी से मिल जाता है। औषधि के रूप में ब्राह्मी पंचांग और पत्तियों का ज्यादा उपयोग किया जाता है।

उपलब्ध आयुर्वेदिक दवाइयां और अन्य प्रोडक्ट्स  

  • ब्राह्मी घृत, ब्राह्मी रसायन, ब्राह्मी पाक, ब्राह्मी तेल, सारस्वतारिष्ट, सारस्वत पाउडर आदि।

(Benefits, home remedies of Bacopa monnieri, Brahmi)

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