वात नाशक भोज्य पदार्थ जो वायु रोग (वात दोष) का करे निवारण

आयुर्वेद में फलों, सब्जियों और मसालों का उपयोग वात नाशक की तरह प्रयोग करने का बहुत पुराने समय से होता आया है। जो कि वायु को बाहर निकालते हैं और पेट की तकलीफ से राहत दिलाते हैं। इसके लिए पौधों में उपस्थित तेल सबसे उपयोगी माना जाता है। यह वात नाशक तेल कोमल मांसपेशियों को राहत देता है जिससे गैस बाहर निकलती है। कुछ मामलों में गैस आहार नाली और आमाशय के बीच स्थित स्फिन्क्टर पेशी के द्वारा ऊपर को धकेली जाती है जिसे डकार कहा जाता है। वात नाशक पदार्थ आंतों की मांसपेशियों को भी तनाव रहित करते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको 19 वात नाशक सब्जियों और मसालों के बारे में बतायेंगे जिनसे वात संतुलित होता है |

वात नाशक (वातहर) पदार्थ

19 वात नाशक भोज्य पदार्थ जो वायु रोग (वात दोष) का करे निवारण वात नाशक पदार्थ vata naashak food

वात नाशक डाइट

वात नाशक पदार्थ : बड़ी सौंफ

  • इस मसाले में वात नाशक गुण होते हैं। यह पेट से गैस को बाहर निकालने के लिए बढ़िया दवा है। इसे अन्य पाचक पदार्थों जैसे अदरक, जीरा और काली मिर्च के साथ मिलाकर काढ़े के रूप में भी लिया जा सकता है। इस काढ़े को बनाने का आसान तरीका यह है कि एक चम्मच सौंफ को एक कप उबलते पानी में मिलाकर इस मिश्रण को रात भर रखा रहने दिया जाए। सुबह इसे छानकर पानी को शहद मिलाकर लिया जाए। यह पेट साफ़ करने में मदद करता है और पेट की वायु और बिना पचे पदार्थों को शरीर से निकालने में सहायक होता है।

वात नाशक पदार्थ : हींग

  • हींग से तो आप अच्छी तरह परिचित होंगे ही, एक गोंद जैसा पदार्थ होता है जो बारहमासी पौधे से मिलता है। इस पौधे की जड़े पीली और गाजर के समान होती हैं। हींग का रंग गहरा पीला सा होता है और इसमें तीखी गंध होती है। इसे मसालों में महक देने वाले मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हींग भी वात नाशक भोजन है। यह पेट की कई बीमारियों की आदर्श दवा है। यह पेट की गैस के लिए रामबाण दवा है। इसके चलते लगभग सभी पाचक दवाओं में इसका उपयोग किया जाता है। बदहजमी और पेट फूलने की स्थिति में हींग को गरम पानी में घोलकर उसमें कपड़ा भिगोकर उससे पेट को सेंकने से लाभ होता है।

वात नाशक पदार्थ : अजवायन

  • अजवायन का प्रयोग पुराने समय से अजीर्ण, पेट का बढ़ना आदि पाचन तंत्र की बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है। वायु को पेट से निकालने के लिए इसके बीजों को पान के साथ खाया जा सकता है। अजवायन का एक चम्मच सेंधा नमक से साथ मिलाकर लेना अपच के लिए कारगर घरेलु दवा है। अजवायन का तेल भी अपच और गैस की स्थिति में लाभकारी होता है। इसे 1 या 3 बूंदों की मात्रा में दिया जाता है। अजवायन का पानी जो बीजों को भिगोकर उन्हें छानकर तैयार किया जाता है, पेट फूलने, अपच और वात नाशक के रूप बढ़िया दवा है। पेट फूलने की स्थिति में अजवायन के बीजों और सूखे अदरक को ढाई गुना नींबू के रस में भिगोकर रखा जाता है। इस मिश्रण को सुखाया जाता है और काले नमक के साथ पीसा जाता है। पेट के फूलने की बीमारी में इस चूर्ण की दो ग्राम मात्रा को गरम पानी के साथ लेना चाहिए।

वात नाशक पदार्थ : हरीतकी (हरड)

  • हरीतकी भी एक वात नाशक पदार्थ है। यह भी पेट की गैस के उपचार में मदद करता है। इसका रस एसिडिटी और सीने की जलन के लिए उपयोगी होता है। यदि इसे दिन के भोजन के बाद लिया जाए तो यह पेट की अम्लीयता को खत्म कर देता है। अच्छे परिणामों के लिए इस रस को आंवले के रस के साथ मिलाकर लिया जाना चाहिए। हरड के एक टुकड़े को रोज चबाने से भी सीने की जलन में राहत मिलती है।

वात नाशक पदार्थ : दालचीनी

  • दालचीनी पाचन क्रिया को तेज़ करती है तथा वात को संतुलित करती है | यह पेट की गैस को बाहर निकालती है। दालचीनी के चूर्ण को एक गिलास पानी में उबालकर इसमें एक चुटकी काली मिर्च और थोड़ा शहद मिलाकर पीने से पेट के दर्द और बादी से राहत मिलती है। इस पेय को एक चम्मच मात्रा में को खाना खाने के आधा घंटे के बाद लेना चाहिए।

वात नाशक पदार्थ : छाछ (मट्ठा)

  • पतली छाछ पेट की गैस से राहत पाने के लिए बड़ा ही आसान उपाय है। इस चौथाई चम्मच काली मिर्च के साथ मिलाकर पीना चाहिए। अच्छे परिणाम के लिए इसमें चौथाई चम्मच पिसा जीरा भी मिलाया जा सकता है। पेट की गैस के उपचार के लिए छाछ का एनीमा देना भी लाभदायक होता है।

वात नाशक पदार्थ : खट्टे फल

  • खट्टे फलों की श्रेणी में संतरा, नींबू, अंगूर, मौसंबी, हरा नींबू और माल्टा शामिल है। ये फल विटामिन सी के अच्छे स्रोत होने के साथ ही ये सुगंध और स्वाद के लिए भी जाने जाते है | खट्टे फलों में उपस्थित विटामिन सी, केल्शियम, एलिगो तत्व, आसानी से पचाने वाली शर्करा, सिट्रिक अम्ल और साइट्रेट के कारण वात नाशक फलों के रूप में इनका प्रयोग किया जाता है। हालाँकि ये फल स्वाद में थोड़े खट्टे होते हैं पर इनका अम्ल शरीर में एसिड की मात्रा को नहीं बढाता बल्कि इसके उलट प्रभाव पैदा करता है। कार्बनिक अम्लों के अम्लीय लवण जैसे पोटेशियम साइट्रेट आक्सीकरण की क्रिया द्वारा अपनी अम्लीयता को खो देते हैं। इसलिए अंत में केवल क्षारीय पदार्थ बाकी रह जाते हैं। इसके कारण सभी खट्टे फल गैस से राहत देते हैं। और अम्लीयता, अपच और वात असंतुलन संबंधी बीमारियों को दूर करते हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण फल नींबू और हरा नींबू है। नींबू का रस अपनी अम्लीयता के माध्यम से पेट में जाकर जीवाणुओं से लड़ता है। हरे नींबू का रस भी यही काम करता है। एक चम्मच नींबू के रस को शहद की समान मात्रा के साथ मिलाकर चाटने से उल्टी, अपच, सीने की जलन और अधिक लार आने की दिक्कतों से राहत मिलती है। एक चम्मच हरे नींबू के रस को पानी में मिलाकर उसमें एक चुटकी मीठा सोडा मिलाने से पेट की अम्लीयता से आराम मिलता है। यह अपच की स्थिति को भी दूर करता है | खट्टे फल शरीर की वायु या वात विकार या बादी हटाने की दवा की तरह से भी काम करते है |

वात नाशक पदार्थ : लोंग

  • लौंग एक प्रसिद्ध मसाला है जो वात नाशक के रूप में भी उपयोगी है। यह पेट फूलने और अपच की समस्याओं में बहुत उपयोगी है। छह लौंग को तीस मिलीग्राम पानी में उबालकर इस काढ़े को दिन में तीन बार खाना खाने के बाद लेने से इन बीमारियों में लाभ मिलता है।

वात नाशक पदार्थ : नारियल

  • नारियल का पानी वात नाशक होता है। यह सीने की जलन और अपच की रामबाण दवा है। इसे पीने से पेट को आराम मिलता है और जरुरी विटामिन और लवण भी प्राप्त होते हैं। यदि एक दिन बिना कुछ खाए पिए केवल नारियल का पानी ही पीया जाए तो पेट जल्दी ही अपनी सामान्य अवस्था में आ जाता है। पका हुआ, सूखा नारियल भी अम्लीयता की स्थिति में लाभ देता है। नारियल में उपस्थित तेल पेट में एसिड के स्त्राव को नियंत्रित करता है और रोगी को राहत देता है।
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वात नाशक पदार्थ : ककड़ी

  • यह सब्ज़ी के रूप में इस्तेमाल में लाया जाता है जो कि गैस और एसिडिटी को दूर करता है। ककड़ी का रस पेट के छालों और वात नाशक पदार्थ के रूप में अचूक दवा है। यह पेट की जलन से तुरंत राहत दिलाता है। इस रस को हर दो घंटे में 120 से 180 मिली ग्राम की मात्रा में लेना चाहिए। ककड़ी में 96 प्रतिशत पानी होता है अत: इसमें रस की पर्याप्त मात्रा प्राप्त हो सकती है।

वात नाशक पदार्थ : सुआ

वात नाशक पदार्थ vata naashak food

सुवा सब्जी

  • सुआ भी वात नाशक भोजन है। इसके बीजों से निकाला गया तेल पेट की बादी और अति अम्लीयता के लिए बढ़िया दवा है। सुआ के तेल की एक बूंद को अरंडी के तेल के साथ मिलाकर लेने से पेट की मरोड़ और दर्द से राहत मिलती है और पेट साफ होता है जिससे आंतों को आराम मिलता है।

वात नाशक पदार्थ : सौंफ के बीज

  • सौंफ के बीज भी वात नाशक होते है जो पेट की गैस बाहर निकालने में सहायता करते हैं। एक चम्मच सौंफ को 100 मिली पानी में आधा घंटे तक उबालकर काढ़ा तैयार किया जाता है। यह काढ़ा अपच, बादी और उल्टी के लिए बढ़िया दवा है।

वात नाशक पदार्थ : लहसुन

  • लहसुन को प्राचीन औषधि शास्त्र में वात नाशक (वातहर ) के रूप में बड़ा महत्व दिया जाता रहा है। गैस पैदा करने वाले पदार्थों को लहसुन डालकर पकाने से उनकी गैस उत्पन्न करने वाले सभी कारण खत्म हो जाते है। भारत के जी.बी पन्त विश्वविद्यालय में हुए एक शोध में लहसुन के वात नाशक गुण एक रिसर्च में प्रमाणित हुए हैं। यह पता चलने के बाद कि मटर जानवरों में गैस पैदा करती है, शोधकर्ताओं ने कुत्तों पर एक शोध किया जिसमें उन्होंने जानवरों को मटर के साथ थोड़ा लहसुन भी खिलाया था, जितना हम सामान्यतः भोजन बनाने में इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने पाया कि मटर में लहसुन मिलाने से पेट की गैस में कमी आई।

वात नाशक पदार्थ : अदरक

  • आयुर्वेद में अदरक का उपयोग वात नाशक और गैस ठीक करने वाली औषधि के रूप में लंबे समय से करते आए हैं। इसका सेवन करना पेट की बीमारियों में आराम दिलाता है। यह पेट की बादी के लिए बढ़िया दवा है। खाने के बाद अदरक का एक टुकड़ा चूसने से इन सभी बीमारियों से निश्चित रूप से बचा जा सकता है। इसका सक्रिय प्रभाव लार, एंजायम और तेलों के अत्यधिक स्त्राव को रोकता है। अदरक या इसके चूर्ण की चाय बनाकर पीना भी पेट की तकलीफ में आराम देता है। इसे हमेशा खाने के बाद पूंट-घूट करके पीना चाहिए।

वात नाशक पदार्थ : पुदीना

  • पुदीना प्रचलित मसाला है, जिसे भारत में खाना पकाने में बहुतायत से उपयोग में लाया जाता है। इसमें कई विटामिन होते हैं और लवणों की मात्रा भी भरपूर होती है। यह एक वात नाशक के रूप में और बादी को कम करनेवाली दवा के रूप में महत्वपूर्ण है। यह पेट की प्रक्रियाओं को चुस्त दुरुस्त बनाता है, पाचन को ताकत देता है और जीवाणुओं के संक्रमण को खत्म करता है। पुदीना में वात नाशक गुण होते हैं। इसकी पत्तियों का रस भूख बढ़ाने वाला होता है। इसमें समान मात्रा में नींबू का रस और शहद मिलाने से इसका प्रभाव बढ़ जाता है |
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वात नाशक पदार्थ : शाहजीरा

वात नाशक पदार्थ vata naashak food

शाहजीरा

  • शाहजीरा भी प्रचलित मसाला और सुगंधीकारक वात नाशक पदार्थ है। इसके बीज भूरे रंग के, कड़े और छूने पर नुकीले लगनेवाले होते हैं। ये सुगन्धित होते हैं, स्वाद तीखा होता है। और इसको खाने के बाद मुंह में गरमाहट सी महसूस होती है। शाहजीरा भी गैस ठीक करने में सहायता करता है। साथ ही यह दवा के बुरे असर को भी रोकता है। इसके बीजों की अपेक्षा उनके तेल का इस्तेमाल बीमारी के इलाज में अधिक किया जाता है। पेट की बादी के लिए शाहजीरे की चाय पीना लाभ देता है। इसके लिए एक चम्मच शाहजीरे को डेढ़ से दो लीटर पानी में उबालकर उसे धीमी आंच पर अगले पंद्रह मिनिट तक रखा जाता है। फिर उसे छानकर घूँट-घूटकर पीया जाता है।

वात नाशक पदार्थ : अल्फा अल्फ़ा

अंकुरित अल्फ़ा अल्फ़ा वात नाशक पदार्थ vata naashak food

अंकुरित अल्फ़ा अल्फ़ा

  • अल्फा अल्फ़ा के बीज स्वास्थ्य रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसका नियमित उपयोग शरीर में पाचन तंत्र की बीमारियों से बचाव रहता है। इसे जब चाय के रूप में लिया जाता है तो इससे एसिडिटी, खट्टी डकारे, गैस और शरीर की अम्लता खत्म होती है | यह शरीर में स्त्रावित होने वाले हायड्रोक्लोरिक अम्ल और पेप्सिन एंजायम की मात्रा को भी नियंत्रित करता है। इस चाय में पुदीना मिलाकर पीने से गरिष्ठ भोजन करने से हुई बदहजमी भी ठीक हो जाती है ।

वात नाशक पदार्थ : आजमोद

  • आजमोद पाचन क्रिया को दुरुस्त करके पेट की गैस से राहत दिलाता है। यह अपच और पेट की बादी के लिए प्रचलित दवाओं में से एक है। इसकी ताज़ा पत्तियों की कुछ मात्रा को एक चौथाई चम्मच सूखी हुई सब्जी को पानी के साथ लेने से इन बीमारियों में आराम मिलता है। ताज़ा प्राजमोड़ा थोड़ा कड़ा होता है। इसलिए इसे अच्छी तरह से मसलकर ही खाना चाहिए।

वात नाशक पदार्थ : कद्दू

  • कददू एक क्षारीय भोज्य पदार्थ है और रेचक गुण रखता है। यह आसानी से पचता है और गैस नहीं बनाता साथ ही यह बेहतरीन वात नाशक सब्जी भी हैं । यदि पेट में अम्ल बढ़ने के कारण तकलीफ हो रही हो तो इसका सेवन लाभ देता है। अत्यधिक अपच, अम्लीयता और पेट में दर्द की स्थिति में 120 मिली रस को पतला करके पीना चाहिए। इस रस को कद्दू को पानी के साथ पीसकर और इसे कपड़े से छानकर बनाया जा सकता है। पीने से पहले इसमें शहद और नींबू का रस मिलाया जा सकता है।

तो इस प्रकार ये सभी भोज्य पदार्थ वात नाशक है : – अल्फा अल्फा, बड़ी सौंफ, हींग, अजवायन, छाछ, शाहजीरा, हरीतकी (हरड), दालचीनी, खट्टे फल, लौंग, नारियल, सुआ, सौंफ, लहसुन, अदरक, पुदीना, अजमोदा, कददू |

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