ल्यूकोरिया में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं : श्वेत प्रदर रोग में भोजन

ल्यूकोरिया में रोगी का सही भोजन :- अपने पिछले 2 आर्टिकल में हमने श्वेत प्रदर यानि ल्यूकोरिया बीमारी होने के प्रमुख कारण, लक्षण तथा इस बीमारी से छुटकारा पाने के लिए घरेलू आयुर्वेदिक इलाज के उपाय भी बताये थे | इस आर्टिकल में हम ल्यूकोरिया में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं इस विषय पर बताएँगे | ल्यूकोरिया में महिलाओ की योनी से सफेद पानी जैसा द्रव निकलता है। यह नारी इंद्रियों की एक असहज और अस्वाभाविक प्रक्रिया होती है। अगर शुरुआत में ही इस रोग का उपचार सावधानीपूर्वक नहीं किया गया तो आगे जाकर यह गंभीर रूप धारण कर सकता है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन से यह बात सामने आई है कि गर्भाशय और प्रजनन अंग के ऊपरी भाग से बहकर आनेवाला द्रव निचले भाग में इकट्ठा होता जाता है। यह हालत महीनों तक लगातार चलती रह सकती है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार शारीरिक कमजोरी की अधिकता भी ल्यूकोरिया रोग को जन्म देती है। बदहजमी, कब्ज, गर्भाशय की विकृति, ऋतुस्राव में रुकावट व अधिक मात्रा में स्राव होने के कारण भी श्वेत प्रदर हो सकता है। मूत्राशय में सूजन होने पर भी ल्यूकोरिया रोग हो सकता है। इस रोग में रोगिणी महिला के शरीर के विभिन्न अंगों में दर्द, योनि में जलन, खुजली होती है। स्त्रियों की कमर में अधिक दर्द होता है।  श्वेत प्रदर में योनि में तेज जलन होती है। थोड़ा-सा काम करने में भी नवयुवतियों को अधिक दर्द होता है। किसी भी रोग को ठीक करने में जितना महत्त्व दवाओ का होता है उतना ही महत्त्व सही खानपान का भी होता है तो आइये जानते है ल्यूकोरिया में मरीज का आदर्श भोजन कैसा होना चाहिए |

ल्यूकोरिया में आहार

ल्यूकोरिया में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं : श्वेत प्रदर रोग में भोजन
ल्यूकोरिया श्वेत प्रदर रोग में भोजन

आइए, अब बताएँ, भोजन से उपचार आरंभ कैसे करें। ल्यूकोरिया में मरीज को दो-तीन दिन तक उपवास करना चाहिए। हाँ, आवश्यकतानुसार नींबू-पानी तथा फलों का रस ले सकती हैं, ताकि शरीर में जमा सारी गंदगी बाहर निकल जाए । इस दौरान गर्म पानी पीजिए, अगर आपको अकसर कब्ज रहता है तो उसका भी उपचार कीजिए।

उपवास के बाद करीब एक हफ्ते तक फलों पर निर्भर रहिए। दिन में तीन बार रसीले फलों का आनंद लीजिए, जैसे-सेब, नाशपाती, अंगूर, संतरा, अनन्नास, आडू इत्यादि। अगर किसी रोगी के शरीर में खून की कमी है या वजन आवश्यकता से कम है तो उसे फलों के साथ दूध भी दिया जा सकता है। कुछ ही दिनों में संतुलित भोजन अपना असर दिखाना शुरू कर देगा । आइए, संतुलित भोजन का डाइट चार्ट हम ही बता दें।

  • ल्यूकोरिया में रोगी को हरी सब्जिया , फल जैसे केले, पके मीठे अंगूर, सेब, फालसा, नारंगी, अनार, आंवला, पपीता, चीकू, मौसमी आदि , पुराने गेहु की रोटी, सिंघाडे का आटा, पुराने चावल, चावल का मांड, दलिया, देसी गाय का दूध, घी, छाछ, मक्खन, अरहर, मूंग की दाल, कच्चे केले की सब्जी खानी चाहिए |
  • आहार: दिन में नींबू मिलाकर तथा सादा पानी अधिक मात्रा में पिएं। दो बार नीबू के साथ शहद भी मिला सकते हैं। पानी ताजा या गर्म, जैसा अच्छा लगे पीना चाहिए।
  • तीन सप्ताह तक कच्ची सब्जी के रस, सब्जी का सूप, फल व फलों के रस, अदरक-काली मिर्च-इलायची की चाय, किशमिश-मुनक्का भिगोकर तथा नीबू-शहद पानी ही लें, तो इस रोग में विशेष लाभ मिलेगा।
  • सुबह नाश्ते में अंकुरित मूंग या मोठ या दूध-दलिया या फल-दूध, दोपहर में सलाद, चपाती, सब्जी तथा रात में सब्जी का सूप, फल लें। बाकी समय आवश्यकतानुसार सब्जी व फलों के रस व फल खाएं। इस प्रकार दो-तीन महीने बिता दें। इससे किसी प्रकार का रोग नहीं होगा। इस उपचार के बीच कोई दवा नहीं खानी चाहिए तथा कोई अधिक मेहनत वाला काम नहीं करना चाहिए।
  • ल्यूकोरिया में सिंघाड़े का हलवा भी लाभ देता है। एक महीना तक रोजाना सुबह इसे बनाकर खाएं।
  • दो पके हुए केले तथा एक चम्मच शहद, दोनों को एक साथ खाएं। इसके बाद एक छोटी इलायची खा लें। ल्यूकोरिया में बड़ा फायदा करता है।  
  • ल्यूकोरिया में रोगी महिला को सफेद मूसली को शरबत के साथ खिलाएं।
  • ल्यूकोरिया में रोगी महिला को भोजन में सोंठ, जीरा तथा कुलथ खाया जाये तो जल्दी लाभ होगा।
  • ल्यूकोरिया में रोगी को ताज़ा फल जरूर खिलाएं। चुकंदर, फालसा, केला, अंगूर आदि बहुत लाभकारी होते हैं।  
  • मसूर की दाल खाना भी बेहतर रहेगा। यदि अंकुरित मसूर खिलाएं तो बहुत जल्दी आराम मिलेगा।

ल्यूकोरिया में मरीज का आहार चार्ट

  • सुबह सोकर उठते ही : एक गिलास नींबू या नारंगी का रस कुनकुने पानी के साथ लीजिए।
  • ल्यूकोरिया में नाश्ते में फलों का रस लें बस फल वैसे ही लें जिनमें एसिड हो, जैसे-सेब, नारंगी, आडू और हाँ, दूध पीना ना भूलिएगा।  
  • दोपहर का भोजन : अब उबली सब्जियाँ, गेहूँ की रोटियाँ और मक्खन लीजिये।
  • सोने से पहले : सब्जियों का रस, सभी उपलब्ध सब्जियों का सलाद, अंजीर और मुनक्का फल या फलों का ताजा रस लेना ही अच्छा होता है।
  • ल्यूकोरिया में चीनी, मैदा, तले हुए पदार्थ, चिकनाईयुक्त पदार्थ, मसालेदार वस्तुओं, चाय-कॉफी इत्यादि से दूर रहना ही आपके लिए फायदेमंद है।

ल्यूकोरिया में परहेज

  • ल्यूकोरिया में सादा, आसानी से पचने वाला तथा हलका भोजन लेना फायदेमंद रहता है।
  • मांस-अंडा रोग ल्यूकोरिया रोग को बढ़ाता है।
  • ल्यूकोरिया में गरिष्ठ भोजन, तले पदार्थ, अधिक मसाले, मिर्च तथा तेज़ नमक से बचें।
  • खोया तथा खोये से बने सभी मिठाई खाना बंद कर दें।
  • ल्यूकोरिया में लाल मिर्च तथा तेज़ गरम मसाले बिलकुल न खाएं।  
  • टिक्की, पकौड़ा, समोसा, चाउमिन, बिरयानी आदि सब ल्यूकोरिया में खाना हानिकारक हैं। इनसे बचें।
  • ल्यूकोरिया में कब्ज़ से बचें। नियमित त्रिफला तथा अधिक पानी पीना रोग से बचाव करते है |
  • सुबह उठकर कम-से-कम दो गिलास पानी तथा बाकि बचे दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीने, चाय तथा कॉफी से दूर रहने से ल्यूकोरिया में जल्दी फायदा होता है।  

ल्यूकोरिया में कुछ बचाव तथा सावधानियों की जानकारी

  • ल्यूकोरिया रोग की पहचान हो जाने पर उपचार तो करें ही, साथ में कुछ खाने-पीने के परहेज़ तथा सावधानियों पर भी ध्यान दें। ऐसा करने से रोग जल्दी ठीक होता है तथा बार-बार सिर नहीं उठाता।
  • ल्यूकोरिया में व्यक्तिगत साफ सफाई की ओर विशेष ध्यान दें |
  • अपनी सोच में अधिक चिंता, भय, शोक, टेंशन आदि को न आने दें।
  • रेशमी या कृत्रिम रेशों से बने अंतर्वस्त्र न पहनें |
  • सुबह लंबी सैर की आदत डालें।
  • हलका व्यायाम करना शुरू करें। यदि कोई योगासन कर सकें तो जरुर करें। स्वास्थ्य में भी सुधार होगा तथा रोग भी खत्म होगा।
  • ल्यूकोरिया में शरीर के भीतर रखने वाली दवा युक्त पेसरी का इस्तेमाल चिकित्सक की देखरेख में करें |
  • यदि आप मधुमेह से पीड़ित हैं तो शुगर की मात्रा में नियंत्रण भी जरूरी है | गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल बंद कर के कोई और गर्भ निरोधक विधि अपनाएं |

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