पथरी का इलाज आयुर्वेदिक उपायों द्वारा तथा जानिए पथरी का दर्द कैसे रोके

पेशाब से जुड़े रोग हो या पथरी रोग, सब कुछ गुर्दो (किडनी) की खराबी से पैदा होते है। पथरी का इलाज जानने से पहले जरा किडनी की कार्य प्रणाली को समझ लेते है और यह भी जान लेते है की यह रोग आखिर क्यों और कैसे पैदा होता है ? गुर्दो की संरचना व कार्य प्रणाली– शरीर में दो किडनी होती हैं, एक दाईं तरफ व दूसरी बाईं तरफ | दोनों गुर्दो का काम एक जैसा होता है और ये साथ-साथ मिलकर कार्य करते हैं। गुर्दो का रंग भूरा तथा वजन लगभग 150 ग्राम होता है। आकार सेम के बीज की तरह होता है। प्रत्येक गुर्दे में दस लाख से ज्यादा बारीक फिल्टर होते हैं जिनसे होकर सारे शरीर का खून एक घंटे में दो बार साफ़ होता है। यह कार्य छननी की तरह होता है जहां से खून लगातार छाना जाता है ताकि गैरजरूरी, नुकसानदायक तत्त्वों को पेशाब द्वारा शरीर से बाहर निकाला जा सके | पेशाब पहले गुर्दो में इकट्ठा होता है, फिर गुर्दो से लगी नली यूरेटर द्वारा मूत्राशय (ब्लेडर) में आता है। शरीर में सोडियम व पोटैशियम की मात्रा में संतुलन रखने का कार्य गुर्दे ही करते हैं। इस संतुलन के बिगड़ते ही शरीर में बीमारियाँ पैदा होने लगती है जिनमे से पथरी रोग भी एक है | शरीर में रक्त कोशिकाओं के निर्माण और पानी की मात्रा का सही संतुलन बनाए रखना और रक्त में अम्ल (एसिड) या क्षार (एल्कली) की अधिकता को रोकने का काम भी गुर्दो का ही होता है।

यदि दोनों में से एक गुर्दे का दो-तिहाई भाग भी कार्य कर रहा हो तो जीवित रहा जा सकता है। इसलिए  आवश्यकता पड़ने पर एक स्वस्थ व्यक्ति, रोगग्रस्त व्यक्ति को अपना एक गुर्दा दान में भी दे सकता है। किसी भी कारण या कारणों से गुर्दो में खराबी और इसकी कार्यप्रणाली में रुकावट होने पर जो बीमारियाँ हो सकती है वह इस प्रकार हैं | गुर्दो की सूजन, गुर्दो का फेल्योर, शरीर में यूरिया, क्रिटिनीन, लवण आदि का असंतुलन, मधुमेह, गुर्दो में पथरी, पेशाब में एल्ब्यूमिन, फॉस्फेट आदि का स्राव, गुर्दी में फोड़ा, बहूमूत्र, मूत्र में रक्त आना, पेशाब का संक्रमण होना आदि | ऐसी स्थितियों में किडनियों को सही रखने के लिए पानी, जूस आदि का उचित सेवन करना चाहिए तथा पथरी का इलाज भी समय रहते करवा लेना चाहिए |

पथरी बनने का कारण:- किडनी में कैल्शियम, फॉस्फेट, कार्बोनेट आदि तत्त्वों के लगातार जमा होने से पथरी बनती है। हालाँकि ये सभी तत्त्व पेशाब के साथ निकलते रहते हैं, लेकिन जब किसी कारण से नहीं निकल पाते तब ये किडनियों में इक्टठे होकर पथरी का निर्माण करने लगते हैं। जब पेशाब निकलने में रुकावट होती है तो बहुत तेज़ दर्द होता है जिससे रोगी को इस बीमारी का अनुभव होने लगता है |  पथरी का इलाज करवाने में देरी होने से कभी-कभी पेशाब के साथ पस व रक्त भी निकलने लगता है। रोगी का जी मिचलाता है और उलटी भी होने लगती है। पेशाब भी बूंद-बूंदकर निकलता है और बहुत जलन व दर्द होता है। यदि यह रुकावट शुरुवाती है तो इसका इलाज दवाई से या काफी हद तक घरेलू उपायों द्वारा हो सकता है लेकिन बीमारी के बढ़ जाने के बाद पथरी का इलाज करने के लिए ऑपरेशन ही इसका आखरी इलाज बचता है | इस आर्टिकल में हम ऐसे ही कुछ घरेलू उपचार बता रहे है जिनसे आपको जरुर लाभ मिलेगा | तो आइये जानते हैं पथरी का इलाज के कुछ घरेलू उपाय |

पथरी का इलाज करने के लिए उपाय

पथरी का इलाज आयुर्वेदिक उपायों द्वारा तथा जानिए पथरी का दर्द कैसे रोके Pathri kidni stone ka ilaj

पथरी का इलाज

  • पथरी का इलाज करने के लिए मूली बहुत लाभकारी सब्जी होती है इसके 100 ग्राम रस में मिसरी मिलाकर, बिना कुछ खाए सुबह पीने से गुर्दे का दर्द ठीक होता है और मूली के रस से पथरी भी टूटने लगती है।
  • जवाखार और शक्कर दोनों चीजें दो-दो ग्राम की मात्रा में लेकर, पीसकर पानी के साथ सेवन करने से पथरी टूट-टूटकर पेशाब के साथ निकल जाती है। इस पाउडर को रोजाना सुबह-शाम सेवन करना चाहिए।
  • गाय के दूध का दही बनाकर उसका छाछ निकालें। लगभग 250 ग्राम छाछ में 5 ग्राम जवाखार मिलाकर सुबह शाम पीने से गुर्दे की पथरी ठीक होती है |
  • जौ को पानी में अच्छी तरह उबाले और ठंडा हो जाने के बाद उस पानी को पिएं।
  • हरे नारियल का पानी, सत्तू (जो जौ को भूनने के बाद तैयार किया जाता है) का शर्बत, बेल का शर्बत और पपीता भी पथरी का इलाज करने में लाभदायक होता है।
  • भुट्टे के बालों या खरबूजे के छिलकों को पानी में उबालें और जब पानी ठंडा हो जाए तो उसे बर्तन में इकट्ठा कर लें, इस पानी को दिन में कई बार लेने से पथरी ठीक होती है। छोटी पथरी तो पेशाब में ही निकल जाती है और पेशाब भी खुलकर आता है।
  • पथरी का इलाज करने के लिए शतावरी का चूर्ण पानी के साथ प्रयोग करें। 1/2 चम्मच, दिन में 4 बार लें |
  • मक्का के ताजे बालों (कॉर्न-सिल्क) की चाय किडनी और पेशाब सम्बंधी दोषों को दूर करती है।
  • अजमोद (पार्सले) का रस शरीर से जहरीले तत्त्वों को दूर करता है तथा गुर्दे की पथरी को तोड़ने में मदद करता है। पथरी का इलाज करने के लिए इसकी चाय पियें ।
  • आंवले का रस यदि नियमित रूप से लिया जाए तो पेशाब साफ आएगा, जलन भी कम होगी और पथरी से भी छुटकारा मिलेगा ।
  • केले के तने के बाहरी रेशों का प्रयोग किडनी के अनेक रोगों में लाभदायक होता है।
  • चावल की भूसी यदि 20 ग्राम की मात्रा में रोजाना ली जाए तो पथरी होने की संभावना खत्म हो जाती है।
  • पथरी का इलाज करने के लिए सबा भी बहुत कामयाब है इसके लिए मरीज को सेब का रस पीते रहने से पथरी नहीं बनती। यदि पथरी बन चुकी है। तो टूटकर पेशाब के साथ बाहर आ जाती है।
  • पका जामुन खाने से पथरी रोग में आराम मिलता है। जामुन की गुठली का चूर्ण दही के साथ खाएं।
  • केले के तने का रस चार चम्मच, घी दो चम्मच मिलाकर पिलाने से बंद हुआ पेशाब खुल कर आता है।
  • एक केला खाकर, आधा कप आंवले का रस पीने से पेशाब का बार-बार आना बंद हो जाता है।
  • छुहारा न सिर्फ बहुमूत्र ठीक करता है, बल्कि पथरी में भी उपयोगी रहता है |
  • पथरी का इलाज, मूत्राशय की सूजन, गुर्दो की सफाई के लिए, गाजर, चुकंदर, ककड़ी (या खीरा) का रस, प्रत्येक 150 ग्राम मिलाकर पीने से लाभ होता है। गाजर का रस गुर्दे और मूत्राशय की पथरी को तोड़ने में सक्षम है।
  • गाजर के बीजों को निगलने से भी पथरी टूट जाती है। गाजर का रस गुर्दे व अन्य अंगों में होने वाले जीवाणु संक्रमण को भी समाप्त करता है | इस बीमारी में भोजन का चुनाव भी बहुत जरुरी होता है इसकी जानकारी के लिए पढ़ें ये पोस्ट –
  • पथरी में क्या नहीं खाना चाहिए : परहेज
  • पथरी में क्या खाना चाहिए : किडनी स्टोन में भोजन
  • अजवायन का चूर्ण 3 ग्राम मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से पथरी नष्ट होकर निकल जाती है।
  • पथरी का इलाज करने के लिए रोजाना गन्ने का 250 मिली रस अदरक और नींबू का रस मिलाकर पीने से पथरी नष्ट होती है।
  • प्रतिदिन चौलाई का साग बनाकर खाने से पथरी गलकर निकल जाती है।
  • करेले के 20 ग्राम रस में शहद मिलाकर प्रतिदिन पीने से पथरी निकल जाती है। करेले की सब्जी बनाकर रोजाना खाने से पथरी रोग ठीक होता है।
  • खीरे का रस 150 ग्राम मात्रा में प्रतिदिन दो-तीन बार पीने से गुर्दे की पथरी खत्म होती है। पथरी का इलाज करने के लिए यह भी महत्त्वपूर्ण होता है |
  • प्रतिदिन जामुन खाने से गुर्दे की पथरी धीरे-धीरे खत्म होती है।
  • सहजन की सब्जी प्रतिदिन खाने से गुर्दे की पथरी नष्ट होकर पेशाब के साथ निकल जाती है |
  • नारियल का पानी पथरी के रोगियों के लिए लाभप्रद होता है।

पथरी का इलाज आयुर्वेदिक उपायों द्वारा

  • बरना, गोखरू और काला सरिवा एक समान मात्रा में लेकर कुल 50 मि.ली. का क्वाथ बनाएँ तथा दिन में तीन-चार बार पिलाएँ। इससे पथरी के कारण होने वाले दर्द कम करता है तथा पथरी रोग को भी ठीक करता है।
  • इंद्रजी तथा निशोथ का बारीक पाउडर एक समान मात्रा में मिलाकर लगभग 3 ग्राम की मात्रा में दूध की लस्सी अथवा चावलों के मांड के साथ सुबह -शाम सेवन करने से पथरी के कण निकल जाते हैं तथा दर्द भी ठीक हो जाता है।

पथरी का दर्द कैसे रोके

  • पथरी का इलाज करवाने के दौरान या इससे पहले भी कई बार अचानक दर्द बढ़ जाता है ऐसे हालात में आप इन घरेलू नुस्खो का उपयोग करके दर्द से राहत पा सकते है |
  • तुलसी की पत्तियां, अजवायन 10-10 ग्राम मात्रा में लेकर उसमें 5 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रखें। प्रतिदिन सुबह और शाम 2-2 ग्राम चूर्ण हल्के गर्म पानी के साथ सेवन करने से पथरी के दर्द से तुरंत राहत मिलती है।
  • दालचीनी का चूर्ण बनाकर 1 ग्राम चूर्ण जल के साथ सेवन करने से पथरी के दर्द से राहत मिलती है |
  • खरबूजे के बीजों की गिरी छीलकर, पीसकर जल में मिलाकर हल्का-सा गर्म करके पीने से पथरी के दर्द से राहत मिलती है |
  • अंगूर की बेल के 30 ग्राम पत्तों को पीसकर पानी मिलाकर, छानकर पीने से पथरी के दर्द से तुरंत राहत मिलती है |

आप अपने आप पथरी का इलाज केवल रोग की शुरुवाती अवस्था में ही कर सकते है यदि रोग बढ़ जाये तो किसी चिकित्सक से इलाज करवाएं | इस आर्टिकल में जिन उपायों को बताया गया है उनका उपयोग पथरी का इलाज करवाने के बाद भी जारी रखें ताकि भविष्य में दुबारा पथरी रोग ना हो पाए इसके अतिरिक्त सामान्य जन भी इन सब चीजो का सेवन कर सकते है इनके कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है |

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