डायबिटीज में आहार तथा मधुमेह या डायबिटीज में परहेज की जानकारी

जैसा की हम आपको लगातार बताते आये हैं की मधुमेह का उपचार दवा से कम, सही खानपान से अधिक होता है इसलिए डायबिटीज में आहार की अहमियत बहुत ज्यादा होती है। यदि मधुमेह के मरीज अपने भोजन पर नियंत्रण रखें, तो शुगर लेवल भी कंट्रोल में रहता है। यदि आहार में सीमित कैलोरीज हों, तो मधुमेह से पीड़ित होते हुए भी आप बिना दवाई के या बहुत ही कम दवाई के सहारे आसानी से रह सकते हैं। डायबिटीज में आहार लेते समय फलों और सब्जियों का सलाद बहुत लाभकारी रहता है। डायबिटीज में आहार ऐसा लेना चाहिए जिसमे चीनी की मात्रा अधिक ना हो जैसे-जैम, जैली ये चीजें शरीर में ग्लूकोज़ की मात्रा पर सीधे असर डालती हैं। तो आइये समझते हैं की एक मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति के लिए आदर्श भोजन के क्या-क्या विकल्प मौजूद है |

डायबिटीज में आहार कैसा खाना चाहिए

डायबिटीज में आहार तथा डायबिटीज में परहेज की जानकारी diabetes diet

मधुमेह में उचित भोजन

  • आम तौर पर यह देखा गया है कि डायबिटीज के मरीजों को भूख बहुत लगती है। इसीलिए उनके लिए बहुत जरूरी हो जाता है कि वे अपने आहार का भी ध्यान रखें। अकसर यह गलतफहमी देखी गई है कि रोटी में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है और चावल में कम। जबकि ऐसा नहीं है। रोटी और चावल, दोनों में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा लगभग बराबर होती है। डायबिटीज में आहार ऐसा लें जो कॉम्पलेक्स (मिला जुला) लें। यानी ऐसा आहार, जिसमें दोनों हों।
  • मधुमेह रोगियों की जांच से पता चला है कि भोजन में कांप्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और रेशेदार पदार्थ की मात्रा अधिक होने से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा एक हफ्ते में 32 प्रतिशत कम हो जाती है। इस प्रकार सामान्य जीवन जीने के लिए जरूरी है कि आपके भोजन में फाइबर और कांप्लेक्स कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होनी चाहिए |
  • डायबिटीज में आहार के अंतर्गत आप सुबह नाश्ते के समय दूध ले सकते हैं। क्रीम वाला दूध न लें। टोंड दूध लें, क्योंकि उसमें वसा या चर्बी की मात्रा कम होती है।
  • दलिया, पोहा, उपमा आदि को अपने नाश्ते में शामिल करें।
  • नींबू-पानी व फल लें। केला, लीची, चीकू व आम जैसे फल न लें।
  • भोजन में सलाद अधिक-से-अधिक लें। खीरा, बंदगोभी, प्याज, टमाटर, लौकी, तुरई, बैंगन, करेला, भिंडी, गोभी जैसी सब्जियां लें। साथ ही आप जल्दी-जल्दी भूख लगने पर फिलर के रूप में सलाद भी ले सकते हैं।
  • आलू, अरवी, मटर व चुकंदर सेहत को नुकसान दे सकते हैं। इसलिए बिना आलू की व कम घी-तेल की सब्जियों का सेवन करें। इसके लिए सबसे अच्छा है कि कम घी तेल में बनाई गई तरी वाली सब्जियां लें।
  • डायबिटीज में आहार के अनुसार भोजन में पूरी-परांठा न लें। मैदा और कॉर्नफ्लोर न लें। इसकी जगह घर में बना हुआ सब्जियों वाला सूप लें।
  • आंवला व नींबू शरीर में शुगर की मात्रा कम करते हैं, इसलिए इनको अपने भोजन में जरुर शामिल करें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें। स्नेक्स आदि में सिमित मात्रा में पापकॉर्न लिए जा सकते हैं, पर भुने हुए होने चाहिए तले हुए नहीं ।
  • जामुन का फल जितना खा सकें, प्रतिदिन खाएं।
  • जामुन के बीज के चूर्ण में काला नमक मिलाकर प्रातः सायं खाना स्वास्थ्य लाभ देता है।
  • डायबिटीज में आहार की योजना अनुसार भोजन को संतुलित रखने के लिए कैलोरी नियंत्रण का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। याद रखें, कोई भी ऐसा खाद्य पदार्थ नहीं है, जिसमें कैलोरी न हो। भोजन को ठीक ढंग से व्यवस्थित करने से कैलोरी को तीन-चार भोजनों में बराबर बांटा जा सकता है। इंसुलिन पर निर्भर रहने वाले मधुमेह रोगियों का भोजन, उन्हें दिए जाने वाले इंसुलिन के प्रकार पर निर्भर करता है। डॉक्टर उसी के अनुसार खाद्य पदार्थों की सूची बनाते हैं, जिसका रोगी को सावधानी से पालन करना चाहिए।
  • अगर दिन भर के भोजन में कैलोरी की मात्रा अधिक न हो, तो शहद और गुड़ जैसी चीज थोड़ी मात्रा में खाने की इजाजत दी जा सकती है।
  • डायबिटीज में आहार की योजना बनाते समय यह भी ध्यान रखें की वसा वाले पदार्थों से मिलने वाली कैलोरी की मात्रा भी न्यूनतम होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर दूध या दही से हमें प्रोटीन तो चाहिए, लेकिन क्रीम नहीं। इसलिए दूध को उबाल कर उसे फ्रिज में रख दें। जब उसमें मलाई आ जाए, तो उसे निकाल लें और उसके बाद दही जमाएं या चाय-कॉफी में डालें।
  • रेशा (फाइबर) एक किस्म का कांप्लैक्स कार्बोहाइड्रेट है, जो आंतों में नहीं पचता है। इस वजह से इसमें कैलोरी नहीं होती। इसलिए डायबिटीज में आहार लेते समय इसे प्रमुखता के साथ जोड़ें। रेशा सभी अनाजों और उनके आटों, हरी पत्ते वाली सब्जियों, मटर, दालों, मक्का, गाजर, प्याज, आलू, भिंडी, कुछ अन्य सब्जियों और फलों में पाया जाता है। ये भोज्य पदार्थ प्राथमिकता के आधार पर मधुमेह के रोगियों को देने चाहिए। हालांकि आम, कटहल में रेशा अधिक होता है, लेकिन इनसे परहेज करना चाहिए।
  • गैर इंसुलिन मधुमेह में कुछ पारंपरिक घरेलू इलाज भी असरदार होते हैं। एक चम्मच मेथी का पॉउडर रोजाना सुबह एक गिलास पानी के साथ लें।
  • डायबिटीज में आहार पर ध्यान देने के अतिरिक्त नियमित व्यायाम, जैसे-पैदल चलना या योग करना भी बहुत जरूरी है। इससे दिमाग को भी ताजगी मिलती है। लेकिन अगर कोई इंसुलिन की सुई ले रहा हो, तो उसे कोई भी व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए।
  • यूं तो चालीस साल की उम्र होने के पहले से ही प्रत्येक व्यक्ति को आहार में वसा (चर्बी या चिकनाई) की मात्रा कम कर देनी चाहिए। किन्तु मधुमेह रोगी को इस ओर विशेष सचेत रहना चाहिए। मधुमेह हृदयरोग का आपस में बहुत गहरा सम्बंध होता है। इसलिए संपृक्त वसा एवं कोलेस्ट्रोल युक्त वसा डायबिटीज में आहार की योजना बनाते समय पूरी तरह से बाहर कर दें | खून में कोलेस्ट्रोल स्तर की अधिकता रक्त-वाहिनी में थक्का जमने की क्रिया (एथरोस्कालरोसिस) का कारण बनती है।
  • डायबिटीज में आहार लेते समय अण्डा, मक्खन, घी, पनीर, मलाई, मलाईयुक्त दूध, आइसक्रीम, मांसाहार नहीं खाने चाहिये। मांस में वसा यानि फैट बहुत अधिक मात्रा में होता है ।
  • मलाई निकला हुआ दूध-दही भी अधिक सुरक्षित नहीं होता है। बाजार में मशीन से मलाई निकला (सपरेटा) दूध सबसे अच्छा रहता है।
  • शाकाहारी भोजन में मांसाहार की अपेक्षा कोलेस्ट्रोल काफी कम होता है। इसलिए शाकाहार पर जोर दें |
  • नीम की छाल का काढ़ा भी मधुमेह रोगी को उपयोगी रहता है।
  • मधुमेह रोगी को बरगद की छाल का काढ़ा पिलाने से रोग काबू में आकर घटने लगता है। बरगद की छाल का 50 ग्राम चूर्ण लें। इसे एक लीटर पानी में खूब उबालें। जब पानी आधा लीटर बचे, तो इसे कपड़े से छान लें। इसको एक कप सुबह तथा एक कप शाम को पिलाएं। यह मधुमेह रोग को काबू करने में बहुत प्रभावी है। और भी कई चीजे है जिनको हमने अपने विभिन्न आर्टिकल में काफी विस्तार से बताया हुआ है |
  • मधुमेह के रोगी को 125 कैलोरी ऊर्जा वसा से प्राप्त करनी चाहिए, इससे ज्यादा नहीं। इसका अर्थ है कि डायबिटीज में आहार लेते समय एक बड़ी चम्मच (15 मि.ली.) तेल-घी लेना ही काफी होता है।
  • मधुमेह की बीमारी में रोगी को सन फ्लावर, सोयाबीन, तिल का तेल, बिनौला, मकई का तेल, मूंगफली का तेल, ओलिव ऑयल, सरसों का तेल खाने में प्रयोग करना चाहिए |
  • देशी घी, वनस्पति घी (डालडा), नारियल का तेल, मक्खन या क्रीम, नारियल तेल, ताड़ का तेल उपयोग नहीं करना चाहिए |
  • जैतून का तेल तथा मूंगफली तेल सबसे अच्छा होता है | तेल के विषय में अधिक जानकारी के लिए यहाँ पढ़ें – किस काम का कौन सा तेल
  • कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि डायबिटीज के मरीजों को कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें ज्यादा नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि वे शरीर में जाकर ग्लूकोज में बदल जाती हैं। डायबिटीज़ के लिए ग्लूकोज और फैट की अधिक मात्रा भी खतरनाक है। मधुमेह विशेषज्ञ इस रोग को ऐसा दीमक मानते हैं, जो शरीर को अंदर-ही-अंदर खोखला करता रहता है इसलिए सावधान रहना जरुरी है ।
  • ऐसी आम धारणा है कि अधिक मीठा खाने से मधुमेह की बीमारी होती है। लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है। दरअसल, मधुमेह की बीमारी हो जाने के बाद रक्त में ग्लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है। इसका चीनी खाने से कोई खास ताल्लुक नहीं है |

डायबिटीज में आहार लेते समय स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थो को अधिक शामिल करें

  • चोकरयुक्त अनाज, दाल, फल तथा फलियों में जटिल कार्बोहाइड्रेट होता है अतः इनका प्रयोग जितना चाहे उतना कर सकते हैं।
  • खट्टे फल, सेब, गाजर, सेम, लोबिया, बीज, जौ, जई, नासपाती का सेवन जरुर करें।
  • फल दिन में तीन बार खायें। घर में अथवा फ्रिज में मिठाई की जगह फल रखें। चाय, कॉफी, शराब, बीयर धूम्रपान छोड़ दें इनसे गुर्दो पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। कैफीन चॉकलेट, कोला पेय व खाद्य में भी यही होता है। ये सब मधुमेही के लिए हानिकारक हैं।

डायबिटीज में आहार लेने का टाइम टेबल

  • दिन के सारे भोजन को पांच या छह बार में विभाजित करके लेना चाहिये। एक सामान्य भारतीय व्यक्ति नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का भोजन यानी की तीन बार भोजन करता है। जाहिर है 5-6 बार भोजन करने का मतलब है कि कम मात्रा में अनेक बार। और भोजन ठीक से चबाएं |
  • डायबिटीज में आहार लेने का समय निर्धारण निश्चित होना चाहिए जिसका नियमित पालन करें।
  • प्रत्येक भोजन का कैलोरी निर्धारण भी होना चाहिए। डॉक्टर से परामर्श कर कैलोरी गणना और निर्धारण करें। इन्सुलिन या दवाई सुबह नाश्ते व रात खाने से 15 मिनट पहले लें।
  • दवाई के सेवन तथा आहार की नियमितता से शरीर में ग्लूकोज की मात्रा ठीक स्तर पर बनी रहती है।

डायबिटीज में आहार से सम्बंधित कुछ सवाल और उनके जवाब

डायबिटीज के रोगी का रात का भोजन किस प्रकार का होना चाहिए?

  • उत्तर : डायबिटीज का रोगी जितना संतुलित भोजन करता है, उसके लिए उतना ही अच्छा होता है। रात के भोजन में रोगी को चावल या खिचड़ी अथवा रोटी, एक कटोरी पकी हुई हरी सब्जी, आधा से एक कटोरी तक दही एवं सोते समय एक कप बिना मलाई का फीका दूध लेना चाहिए। इस भोजन की मात्रा को आवश्यकतानुसार कम या ज्यादा किया जा सकता है |

क्या डायबिटीज के रोगी को पकवान या मिठाई खाने के बाद खुराक से अधिक दवाई या गोली का इस्तेमाल करना चाहिए?

  • उत्तर : डायबिटीज के रोगी को कभी भी पकवान या मिठाई अधिक मात्रा में खाने के बाद अधिक दवाई या एक भी गोली का ज्यादा सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से नियंत्रण कठिन हो जाता है। यह भी ध्यान रहे, यदि कोई रोगी शराब का सेवन करता है तो कभी भी शराब पीने के बाद गोली नहीं खानी चाहिए।

क्या डायबिटीज का रोगी चाय के साथ बिस्कुट या ब्रेडपीस ले सकता है?

  • उत्तर: डायबिटीज में आहार के अंतर्गत चाय के साथ या नाश्ते में दो ब्राउन ब्रेडपीस से अधिक नहीं खाने चाहिए। इसके अलावा रोगी तीन-चार बिस्कुट चाय के साथ ले सकता है। रोगी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि ब्रेड को सेंककर खाएँ। लेकिन रोगी को मक्खन, केक, पेस्ट्री व आलूचिप्स के सेवन से बचना चाहिए। नाश्ते में वह चाय के साथ टमाटर या खीरा के साथ सैंडविच बनाकर ले सकता है।

क्या डायबिटीज के रोगी को व्रत, रोजा या उपवास रखना चाहिए?

  • उत्तर : जहाँ तक संभव हो, रोगी को उपवास नहीं रखना चाहिए। यदि रोगी नाश्ते में कुछ अल्पाहार भी लेता है और साथ ही दवाइयों का सेवन जारी रखता है तो उपवास की स्थिति में दोपहर के समय रक्त में शुगर की मात्रा कम हो सकती है। यदि रोगी उपवास के दिन दवाइयों का सेवन नहीं करता तो दूसरे दिन रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ सकती है।

डायबिटीज का रोगी कौन-कौन से मांसाहार ले सकता है?

  • उत्तर : डायबिटीज का रोगी यदि मांसाहार लेना चाहता है तो वह तंदूरी या उबले मुरगे का मांस का सेवन कर सकता है। इसके अलावा डायबिटीज में आहार लेते समय मछली को भी भूनकर या उबालकर खाया जा सकता है। ध्यान रहे कि बकरे के मीट, या किसी भी अन्य किसी बड़े जानवर के रेड मीट का सेवन बिलकुल ना करें। इसके अलावा बटर चिकन या चिकन करी का भी प्रयोग न करें; क्योंकि इनमें चरबी की मात्रा अधिक होती है।

क्या डायबिटीज में आहार में रोगी के लिए सब्जियों का रस लेना चाहिए ?

  • उत्तर : डायबिटीज के रोगी के लिए सब्जियों का रस बहुत लाभदायक होता है। गाजर, पालक, लौकी, शलजम, बंदगोभी व पत्तागोभी को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर उनका जूस निकाल लें। इस जूस में थोड़ा सा नमक मिलाकर पीने से रोगी का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

डायबिटीज के रोगी को एक महीने में कितने घी या तेल का उपयोग करना चाहिए?

  • उत्तर : एक महीने में आधा किलो से अधिक तेल का उपयोग नहीं करना चाहिए।

क्या डायबिटीज के रोगी के लिए हॉरलिक्स, बोर्नबीटा आदि उपयोगी हैं?

  • उत्तर : डायबिटीज के रोगी को बोर्नबीटा, हॉरलिक्स, बूस्ट, मालटोपा, प्रोटीनेक्स आदि खाद्य पदार्थ उपयोग नहीं करने चाहिए, क्योंकि इस प्रकार के सभी पदार्थों में शक्कर की मात्रा अधिक हो सकती है। यदि इनमे शक्कर नहीं हैं तो आप इन्हें डायबिटीज में आहार की योजना बनाते समय शामिल कर सकते हैं |

मधुमेह से जुड़े और अधिक सवालों जवाब के लिए पढ़ें ये आर्टिकल :-

और अंत में कई पाठको का यह प्रश्न बार-बार होता है की कौन-कौन सी फल और सब्जियां खाएं और किसका परहेज रखे ? इस विषय पर वैसे तो हमने लगभग सभी फलों, सब्जियों और ड्राई फ्रूट्स के बारे में जानकारी दे दी है लेकिन फिर भी अगर कोई फल सब्जी सम्मलित ना हो सकी हो तो, इस बारे में इतना चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि लगभग सभी फल और सब्जियों में फैट और शुगर या तो बिलकुल नहीं होता है या फिर बहुत ही कम होता है | इसके लिए साधारण फार्मूला यह है की आप जो भी फल खाएं छिलके सहित खाएं और फलों के जूस की जगह पूरे फल को खाने में प्राथमिकता दें | सब्जियों का जूस लिया जा सकता है |

अन्य सम्बंधित लेख

Leave a Reply