डेंगू बुखार : लक्षण, बचाव, खानपान और उपचार के उपाय

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार डेंगू की बीमारी से दुनिया में हर साल 5 करोड़ व्यक्ति संक्रमित होते हैं। तथा इस रोग से प्रतिवर्ष 12,000 मौतें होती हैं, जिनमें अधिकतर बच्चे होते हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में बँगलादेश, भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, म्याँमार, इंडोनेशिया प्रमुख रूप से डेंगू से प्रभावित देश हैं। दस्त और न्यूमोनिया जैसी बीमारियों के बाद डेंगू यहाँ बच्चों की मौत का दूसरा बड़ा कारण है। यह उन बड़े शहरों में अधिक फैलता है, जहाँ घनी आबादी रहती है और पानी के निकास की सही व्यवस्था नहीं है।

डेंगू की बीमारी क्या है ? कैसे होती है :

डेंगू एडीज इजिप्टी मच्छरों के काटने से होने वाला बुखार है। डेंगू बुखार एक विषाणु से होने वाली एक खतरनाक बीमारी है। यदि इसका तुरंत इलाज न किया जाए तो रोगी की जान भी जा सकती है। डेंगू रोग में जब बुखार के साथ शरीर के उभरे दानो से खून निकलता है तो इसे ‘खूनी डेंगू बुखार’ भी कहा जाता है। यह मच्छर से होने वाले 5 रोगों में से एक है। डेंगू गरम जलवायु वाले पिछड़े देशों में अधिक होता है। डेंगू शहरी क्षेत्रों में अधिकतर पाया गया है। विशेषकर दिल्ली मुंबई में डेंगू के ज्यादातार मामले पाए जाते हैं। मच्छरों से 5 तरह के रोग- मलेरिया, डेंगू , फाइलेरिया, चिकनगुनिया और जापानी बुखार फैलते हैं।

डेंगू रोग का कारण :

बैक्टीरिया से भी छोटे विषाणु मच्छरों द्वारा मानव शरीर में पहुँचते हैं। विशेष तौर पर एडीज इजिप्टी नामक मच्छरों की प्रजाति डेंगू ज्वर फैलाने के लिए उत्तरदायी है। (यह प्रजाति चिकनगुनिया फैलाने के लिए भी उत्तरदायी है।) यह ऐसे मच्छर के काटने पर होता है, जिसमें रिजर्वायर के रूप में डेंगू के अर्बोवाइरस होते हैं। रोगी स्वयं भी डेंगू के विषाणुओं का संग्राहक (रिजर्वायर) होता है। सितंबर और अक्टूबर के महीने में इसका ज्यादा प्रकोप होता है |

जाने डेंगू के लक्षण क्या है और इसका फैलाव कैसे होता है :

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डेंगू बुखार

  • मच्छरों के काटने के बाद लक्षण आने में 8 से 10 दिन का समय लगता है।
  • बीमारी की गंभीरता विभिन्न रोगियों में अलग-अलग तरह की होती है। कुछ मरीजों में रोग 7 से 10 दिनों के अंदर गंभीर स्थिति में पहुँच जाता है, जबकि कई मरीजों में मामूली अवस्था तक सीमित रहता है।
  • शुरू के दो दिनों तक अधिक सिरदर्द व कमजोरी रहती है। शरीर में तो दर्द होता है, लेकिन पीठ, कमर और जोड़ों में अधिक दर्द होता है। आँखों के चारों ओर की हड्डियों में भी तेज दर्द होता है, यहाँ तक कि नजर इधर-उधर चलाने में भी कष्ट होता है।
  • ठंड के साथ अचानक तेज बुखार चढ़ना।
  • सिर, मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना।
  • अत्यधिक कमजोरी लगना, भूख में बेहद कमी तथा जी मितलाना।
  • मुँह का स्वाद खराब होना।
  • गले में हल्का सा दर्द होना।
  • आँखें लाल दिखती हैं। इस स्थिति में रोशनी असहनीय लगती है। आँखों से आँसू निकलते हैं।
  • उलटी करने की इच्छा होती है, भूख और नींद चली जाती है व मरीज उदास हो जाता है।
  • दूसरे-तीसरे दिन लक्षण अस्थायी रूप से चले जाते हैं, फिर एक-दो दिन के बाद फिर से ये ही लक्षण तेज बुखार के साथ दिखते हैं।
  • डेंगू बुखार में गरदन के दोनों ओर की लसिका ग्रंथियों का आकार भी बढ़ जाता है।
  • डेंगू बुखार होने पर शरीर पर दाने या लाल चकत्ते भी उभर आते हैं। शुरू में ये चकत्ते दोनों हाथों और दोनों पैरों पर आते हैं, फिर भुजाओं, जंघाओं, सीने तथा पीठ पर फैल जाते हैं, जबकि चिकनगुनिया में चकत्तों की संख्या कम होती है।
  • पानी पीने और कुछ भी खाने में दिक्कत हो और बार-बार उल्टी आए तो डीहाइड्रेशन का खतरा हो जाता है। ये लिवर एन्जाइम्स में गड़बड़ का सूचक होता है। इसलिए तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए |

डेंगू से बचने के लिए इस्तमाल करें ये घरेलू और प्राकृतिक उपाय :

कई बार बीमारी को रोक पाना मुश्किल होता है लेकिन आपके शरीर की रोग प्रतिरक्षा प्रणाली अगर मजबूत है तो आप आसानी से बीमारी को हराकर जल्द ही ठीक हो सकते है | याद रखे एक कमजोर शरीर किसी छोटी सी बीमारी से भी हार सकता है और एक मजबूत शरीर बड़ी से बड़ी बीमारी से लड़कर जल्द ही ठीक हो जाता है | इसलिए अपने शरीर को मजबूत रखने के लिए नीचे बताये गये उपाय अजमाए |

  • गिलोयः गिलोय मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है | इनके तनों को उबालकर हर्बल ड्रिंक की तरह सर्व किया जा सकता है इसमें तुलसी के पत्ते भी डाले जा सकते हैं |
  • मेथी के पत्तेः यह पत्तियां बुखार कम करने के लिए सहायक हैं. यह पीड़ित का दर्द दूर कर उसे आसानी से नींद में मदद करती हैं. इसकी पत्तियों को पानी में भिगोकर उसके पानी को पीया जा सकता है| इसके अलावा, मेथी पाउडर को भी पानी में मिलाकर पी सकते हैं.
  • पीपते के पत्तेः यह प्लेटलेट्स की गिनती बढ़ाने में हेल्प करता है साथ ही शरीर में दर्द, कमजोरी महसूस होना, उबकाई आना, थकान महसूस होना आदि जैसे बुखार के लक्षण को कम करने में सहायक है.” आप इसकी पत्तियों को कूट कर खा सकते हैं या फिर इन्हें ड्रिंक की तरह भी पिया जा सकता है, जो कि बॉडी से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करते हैं |
  • हल्दीः यह मेटाबालिज्म बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाती है हल्दी को दूध में मिलाकर पीया जा सकता है |
  • तुलसी के पत्ते और काली मिर्चः तुलसी के पत्तों और दो ग्राम काली मिर्च को पानी में उबालकर पीना सेहत के लिए अच्छा रहता है. यह ड्रिंक आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है और एंटी-बैक्टीरियल तत्व के रूप में कार्य करती है | यह भी पढ़ें – काली मिर्च के 35 औषधीय गुण तथा फायदे |
  • पतंजली द्वारा निर्मित गेंहू के ज्वारे का रस -20 मिली , दिव्य गिलोय रस -20 मिली, दिव्य ध्र्तकुमारी स्वरस -20 मिली , पपीते के पत्ते का रस – 20 मिली | बाबा रामदेव के अनुसार इन सभी रसो को मिलाकर पीने से रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या बढती है |
  • हर चार घंटे या दिन में 3-4 बार गिलोय, एलोवेरा, पपीते के पत्ते और अनार का जूस इन चारों को 50-50 ग्राम की मात्रा में मिलाकर पीने से भी प्लेटलेट्स की संख्या बढती है | देखे यह पोस्ट – एलोवेरा जूस बनाने की विधि और फायदे |
  • 2 चम्मच शहद और आधा गिलास कद्दू का रस मिलाकर पीने से भी प्लेटलेट्स बढ़ने लगती हैं |

डेंगू में क्या खाना चाहिए :

  • डेंगू बुखार होने पर गेंहू का दलिया , पौष्टिक सब्ज़ियों से बने सूप, नारियल पानी संतरा ,अदरक का पानी, प्रोटीन के लिए मछली, अंडे, अंकुरित दाल , पनीर, दूध ,नींबू जूस लेना चाहिए |
  • स्ट्रॉरबेरी, अमरूद, कीवि, संतरा ,टमाटर, कद्दू, गाजर, खीरा, चुकंदर और पपीता फलो का सेवन करें |
  • डेंगू बुखार में भारी , तैलीय, मिर्च-मसालों और नमक वाले पकवान नहीं लेना चाहिए | मुंह का स्वाद बनाएं रखने के लिए बार बार नींबू पानी पीते रहें |

खूनी डेंगू बुखार :

  • खूनी डेंगू बुखार दक्षिण-पूर्व एशिया में ही अधिकतर होता है, बाकी क्षेत्रों में यह बहुत कम पाया जाता है। इसमें बुखार आने के तीसरे अथवा चौथे दिन शरीर पर उभरे चकतों से खून निकल सकता है।
  • खून बहने के कारण रोगी के शरीर में रक्त की कमी हो जाती है और ऐसे रोगी की मृत्यु तक हो जाती है। इलाज के बावजूद इस तरह के लक्षणों वाले 10 प्रतिशत रोगी अपनी जान खो बैठते हैं।

डेंगू रोग की पहचान कैसे करें :

  • कई बार डेंगू की गंभीर अवस्था को कुछ चिकित्सक यलो फीवर भी समझ लेते हैं। लेकिन पेशाब की जाँच से सही जानकारी मिल पाती है।
  • खून की जाँच में एंटीबॉडीज का माप बढ़ जाता है, क्योंकि डेंगू रोग के विषाणु खून में भी होते हैं, इसलिए खून की जाँच भी की जा सकती है।
  • खूनी डेंगू बुखार होने पर खून जमाने वाली प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है।

डेंगू बुखार का उपलब्ध इलाज : डेंगू ट्रीटमेंट

  • वैसे डेंगू ज्वर का कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। दर्द निवारक दवाएँ जैसे डाइक्लोफेनिक अथवा पेरासीटामॉल से मरीज के शरीर का दर्द कम किया जाता है।
  • डेंगू के रोगी को डिस्प्रीन, एस्प्रीन कभी नहीं देनी चाहिए |
  • खून बहने के कारण रक्त की कमी को खून चढाने अथवा ब्लड ट्रांसफ्यूजन द्वारा पूरी करते हैं।
  • खूनी डेंगू में कार्टिकोस्टेराड्स दवाओं का भी उपयोग किया जाता है, लेकिन यह सब अनुभवी चिकित्सक के परामर्शानुसार करते हैं।
  • वैसे डेंगू के लक्षण मिलने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए। रोगी को अस्पताल में एडमिट करना उचित रहता है।
  • डेंगू बुखार से पीड़ित मरीज को यदि बुखार 102 डिग्री फा. से अधिक है तो बुखार को कम करने के लिए ठंडे पानी की पट्टी रखकर तापमान कम करने की कोशिश करनी चाहिए | यह भी पढ़ें – चिकनगुनिया के कारण, लक्षण और रोकथाम टिप्स |

डेंगू से बचाव के उपाय :

  • डेंगू से बचने के लिए एडीज मच्छरों से बचना जरूरी है। रुके हुए पानी, यहाँ तक कि कूलरों की टंकियों के पानी को अलग कर देना चाहिए, साथ ही गंदगी और गड्ढों के पानी, कीचड़ इत्यादि को भी निकाल कर देना चाहिए, ताकि इनमें मच्छरों की पैदाइश को रोका जा सके।
  • रोगी भी इस विषाणु का रिजर्वायर (संग्राहक) होता है, अत: उसे अलग मच्छरदानी में रखना चाहिए, ताकि उसे मच्छर काटकर रोग न फैलाएँ।
  • अगर आप किसी मैदान या फार्म हाउस में रहते है तो आजकल डेंगू मच्छरों के लार्वा खानेवाली मछलियाँ (गंबूसिया) हैं, जिनको गड्ढों में भरे पानी या पोखरों के पानी में छोड़ देना चाहिए। इससे भी डेंगू मच्छरों पर रोक लगाई जा सकती है।
  • कीटनाशकों का छिड़काव और फांगिग भी मच्छरों पर नियंत्रण रखती है। मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए आर्गेनोफास्फोरस कीटनाशकों, जैसे-अबेट का प्रयोग करते हैं। इससे तीन महीने तक पानी में लार्वा उत्पन्न नहीं होते और पानी का स्वाद भी नहीं बदलता। इसके अलावा यह पानी मनुष्यों के लिए हानिप्रद भी नहीं होता। कीटनाशक को रेत में मिलाकर उपयोग में लाते हैं।
  • घरों में मच्छरजालियाँ लगवाएँ और फुलपेंट, फुलशर्ट पहनें एवं मोजों का भी उपयोग करें।
  • डेंगू के प्रकोप वाले स्थानों में मच्छरों से बचाव के लिए बहुत ही कम आयतन में (अल्ट्रा लो वॉल्यूम-यू.एल.वी.) मेलाथियान का ऐरोसाल छिड़काव करते हैं (250 मि.ली. प्रति हेक्टेयर)। इस कीटनाशक की हवा में तैरती छोटी-छोटी बूंदें मच्छरों को खत्म कर देती हैं।
  • मच्छर न काटें, इसके लिए लोगों को मच्छरदानियों एवं मच्छर भगानेवाले अन्य साधनों का भी प्रयोग करना चाहिए। धुएँ वाली अगरबत्तियों इत्यादि का प्रयोग करें। घरों में मच्छर जालियाँ लगवाएँ।
  • डेंगू का मच्छर पैदा न हो इसके लिए पानी से भरी हुई टंकियाँ/ ड्रम आदि को ढककर रखें।
  • टायरों में पानी जमा न होने दें।
  • सप्ताह में एक बार कूलर/फूलदान खाली करके सुखा दें।
  • डेंगू का मच्छर दिन के समय काटता है। ऐसे कपड़े पहनें, जो बदन को पूरी तरह ढकें।
  • अधिक बुखार व गंभीर स्थिति में डॉक्टर की सलाह लें। खून की जाँच में डेंगू का पता चल जाता है, जाँच कराएँ।

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