योगासन के लाभ और योग के प्रकार

योगासन के लाभ –योग शरीर के आंतरिक और बाहरी अंगो को स्वस्थ रखने की क्रियाएँ हैं। जब तक हमारे शरीर के आंतरिक और बाहरी अंग स्वस्थ नहीं होते, तब तक हम कोई भी कार्य अच्छी तरह नहीं कर सकते। तन और मन का परस्पर गहरा संबंध है। किसी एक की उपेक्षा कर दूसरे की देखभाल नहीं की जा सकती। यही कारण है कि आज से हजारों वर्ष पूर्व यूनान के लोग ‘स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन’ बसता है (A sound mind in a sound body) उसकी सारी शिक्षा-पद्धति इसी सिद्धांत पर आधारित थी।

Yoga and Its Importance /योग का महत्व

विभिन्न दैनिक शारीरिक क्रियाओं और भोजन करने से शरीर में जो मलमूत्र और विकार उत्पन्न होते हैं, वे सात रास्तों से शरीर के बाहर निकलते हैं : ( 1 ) दाएँ-बाएँ नथुनों (Nostrils) द्वारा, ( 2 ) दाई-बाई आँखों  से, ( 3 ) दाएँ-बाएँ कानों द्वारा, ( 4 ) मुँह द्वारा, ( 5 ) गुदा द्वारा, ( 6 ) जननेंद्रिय द्वारा और ( 7 ) त्वचा द्वारा। इन सात माध्यमो से शरीर के मलमूत्र आदि विकार नियमित रूप से शरीर के बाहर न निकलने पर ही अधिकांश रोग उत्पन्न होते हैं। योगासन-पद्धति द्वारा मलमूत्र आदि सरलतापूर्वक शरीर से बाहर निकलते रहते हैं। फलस्वरूप शरीर पूरी तरह से निरोगी बना रहता है। कुछ वर्षों में योग को लेकर हुई जागरुकता और वैज्ञानिक रूप से इसकी पुष्टि ने योगासन को सारी दुनिया में प्रसिद्ध कर दिया है। जिसमे पतंजलि आयुर्वेद का बहुत बड़ा योगदान है |

आज हम सही भोजन न करने तथा सही श्रम न कर पाने की वजह से बेढंगे शरीर को लिये घूम रहे हैं। कुछ पलों के लिए जमीन पर पालथी मारकर बैठना पड़ जाये तो बहुत मुश्किल हो जाती है। यही हाल रात की नींद का भी है। दिन भर के तनाव और थकान के बाद बिस्तर पर लेट गये हैं, पर नींद मुश्किल से आती है अगर सही खान-पान और उचित व्यायाम नहीं होगा, तो रात भर करवटें ही बदलनी पडेगी।

योगासन के लाभ / Yoga Benefits

योगासन के लाभ benefits-of-yoga

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  • अन्य व्यायाम की पद्धतियों में शरीर के आंतरिक अंगों को पर्याप्त व्यायाम नहीं मिल पाता, जबकि योगासन-पद्धति से शरीर के आंतरिक अंगों को पर्याप्त मात्रा में व्यायाम मिल जाता है। जिससे योगासन से व्यक्ति अधिक समय तक स्वस्थ रहते हुए जी सकता है।
  • योग आसन के लिए बहुत ही कम जगह और कम साधनों की आवश्यकता होती है। योगासन व्यक्ति अकेला ही कर सकता है।
  • व्यायाम की अन्य पद्धतियों की अपेक्षा योगासन का प्रभाव मन और इंद्रियों पर अधिक पड़ता है। इस कारण मन और इंद्रियों को वश में रखने की व्यक्ति की आंतरिक शक्ति का विकास होता है।
  • योगासन में शरीर की ज्यादा उर्जा खर्च नहीं होती है इसलिए अधिक आहार लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती, इसलिए विशेष खर्च नहीं करना पड़ता।
  • योग आसन से शरीर लचीला बनता है। इससे शरीर में स्फूर्ति आती है, काम करने की शक्ति बढ़ती है तथा युवावस्था अधिक समय तक बनी रहती है।
  • अलग अलग योगासनों द्वारा शरीर की भिन्न-भिन्न केशिकाओं का रक्त शीघ्रतापूर्वक शुद्ध किया जा सकता है।
  • योगासन के लाभ मोटापे को कम करने के लिए भी बहुत है (जो एक घातक बीमारी है) क्योंकि योग करने से चर्बी घटती है |
  • योग आसन और प्राणायाम से फेफड़ों के सिकुड़ने और फैलने की शक्ति बढ़ती है। जिससे रक्त अधिक मात्रा में शुद्ध होता है।
  • शरीर की स्फूर्ति और स्वास्थ्य रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन पर निर्भर होती है। आसन द्वारा मेरुदंड को लचीला रखा जा सकता है।
  • योग आसन करते समय बहुत ही कम शक्ति लगती है। इसलिए थकान कम महसूस होती है। इसीलिए योग आसन को ‘अहिंसक क्रिया’ भी कहा जाता है। इसलिए योगासन के लाभ बहुत है मेहनत कम लगती है |
  • योगासन के लाभ सिर्फ शरीर के लिए ही नहीं बल्कि मन और मस्तिक्ष के लिए भी उतने ही है ,योग आसन से मन शांति का अनुभव करता है। इस कारण मानसिक शक्ति बढ़ती है और बुद्धि का विकास होता है।
  • योगासन से शरीर की विभिन्न ग्रंथियों को जाग्रत किया जा सकता है, जिससे उनमें अपेक्षित मात्रा में रस (Metabolism) उत्पन्न होता है। यही रस रक्त में मिलकर शरीर का संतुलित विकास करता है।
  • योग करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है क्योंकि इससे खून में सफ़ेद रक्त कण में बढ़ोतरी होती है |
  • कुछ खास योग करने से दिल धडकन बढती है जिससे से खून का प्रवाह तेज़ी से बढ़ता है जो नसों में जमी वसा की रूकावट को दूर करने में भूमिका निभा सकता है जिससे हार्ट अटैक जैसे गम्भीर बीमारी होने की आशंका कम होती है | वैसे अगर दिल सम्बंधी कोई बीमारी है तो अपने चिकित्सक की सलाह लेकर ही योग किर्याओ को करे | ज्यादा जानकारी के लिए पढ़े हमारा ये पोस्ट योगासन करते समय जरूरी हैं ये 25 सावधानियां
  • योग आसन और प्राणायाम से कब्ज, गैस, मधुमेह, रक्तचाप (ब्लडप्रेशर), हर्निया, सिरदर्द आदि रोग मिटाए जा सकते हैं।
  • योग आसन द्वारा शारीरिक और मानसिक विकास के साथ-साथ बौद्धिक और आत्मिक विकास भी संभव है।
  • बड़ी उम्र के स्त्री-पुरुष भी योगासन कर सकते हैं। यह पूर्णत: भारतीय व्यायाम-पद्धति है। हमारे ऋषि-मुनियों ने हजारों वर्षों तक यह प्रणाली अपनाई थी। जिससे वे लंबे समय तक स्वस्थ रहते थे।
  • योग रक्त शर्करा और एल डी एल (“बुरा”) कोलेस्ट्रॉल को कम करती है और एच डी एल को बढ़ा देता है ( “अच्छा”) कोलेस्ट्रॉल | इसलिए ह्रदय रोगियों और Diabetes मधुमेह रोगियों को तो योग नियमित रूप से करना ही चाहिए |
  • योग आसन से Heart हृदय तथा ज्ञानतंत्र सशक्त होते हैं और उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। मन को शांति मिलती है।
  • योगासन के अभ्यास से शरीर एवं मन को कम समय में काफी आराम मिलता है। नींद से भी अधिक आराम सही ढंग से किया हुआ शवासन प्रदान करता है।
  • नियमित रूप से योगासन करने वाले व्यक्ति के शरीर में किसी तरह की अशुद्धि नहीं रहती, इसलिए उसका मन सदा शांत और प्रसन्न रहता है।

उपयोगी सूचनाएँ योगासनों से पूरा-पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित नियमो का पालन करना चाहिए  :

  • ज्यादा से ज्यादा योगासन के लाभ पाने के लिए योगासन प्रात:काल शौच-क्रिया से निवृत होने के बाद करने चाहिए। यदि नहाने के बाद योगासन किए जाए तो और भी अच्छा है, क्योंकि स्नान से शरीर हल्का और स्फूर्तियुक्त बनता है। साथ ही योगासन सरलता से किए जा सकते हैं। योगासन के बाद स्नान करना हो, तो ठंडे पानी का उपयोग न कर गर्म पानी का उपयोग करना चाहिए। शाम को भोजन करने से पहले भी योगासन किए जा सकते हैं।
  • योग आसन करने की जगह समतल, स्वच्छ, हवादार, प्रकाश युक्त और शांत होनी चाहिए। जमीन पर दरी या आसन बिछा कर योगासन करने चाहिए।
  • योग आसन करते समय मौसम के अनुसार पोशाक पहननी चाहिए | ज्यादा जानकारी के पढ़े – योगासन करते समय जरूरी हैं ये 25 सावधानियां

Classification Of Yoga / योग को चार मुख्य भागो में वर्गीकृत किया गया हैं |

  1. भक्ति योग: भक्ति या प्रेम का पथ।
  2. ज्ञान योग: ज्ञान और स्वंज्ञान यानि स्वं को जानना ।
  3. कर्म योग: कर्म करने का पथ।
  4. राज योग: मानसिक (मन ) को नियंत्रण करने का पथ।

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