दिल की बीमारी से बचाव के उपाय-Heart Disease Prevention

दिल की बीमारी या हृदय के रोग गत सौ वर्ष पूर्व घातक रोगों की सूची में छठे क्रम पर था, लेकिन अब यह एक नंबर पर आ गया है। इसकी वजह यह है कि आजकल की मशीनी रफ्तार वाली जिंदगी में बढ़ रहे मानसिक तनाव, दूषित वातावरण तथा चका चौंध भरे कृत्रिम जीवन में गलत रहन-सहन, बेमेल खान-पान और बुरे व्यसनों के कारण दिल की बीमारीयों ने बहुत भयानक रूप धारण कर लिया है। दिल की बीमारी होने के महत्तवपूर्ण कारक होते है – शारीरिक , अनुवांशिक , और मानसिक ,हम इन तीनो पर रोशनी डालने का प्रयास करेंगे |

दिल की बीमारी या हृदय रोगों के प्रकार / Types of Heart Disease.

एलोपैथिक चिकित्सा विज्ञान के मतानुसार दिल की बीमारी मुख्य रूप से 20 प्रकार के माने गए हैं, जिनका संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है |

  1. Congenital Heart Disease– (जन्मजात हृदय विकार) जन्म जात दिल की बीमारी। 2. Premature Beats -अपरिपक्व दिल की धड़कनें। 3. बेडीकार्डिया -दिल का सामान्य गति से कम धड़कना । 4. टेकीकार्डिया -धड़कन असामान्य गति से बढ़ना। 5. एन्जाइना पेक्टोरिस –दिल की मांसपेशियों में रक्त संचार की कमी से हृदय में तीव्र पीड़ा, जो बाएं कंधे या पूरे हाथ तक फैले। 6. हार्ट ब्लाक – दिल में अवरोध 7. कोरोनरी ग्राम्बोसिस – दिल की एक या अधिक धमनियों में रुकावट होना। 8. कार्डियक डायलेटेशन -हृदय गुहा के आकार में वृद्धि। 9. आर्टिकुलर फिब्रिलेशन -हृदय की पेशियों का सिकुड़ना। 10. पेरीकाडर्गइटिस – दिल के आवरण में शोथ होना। 11. कार्डियक हायपरट्राफी -हृदय के आकार का असामान्य होना । 12. पेरीकार्डियल इन्फ्यूजन -हृदय के आसपास तरल पदार्थ इकट्ठा होना। 13. मायोकार्डियल डिजनरेशन – दिल प्राचीर के अंदर की परत का क्षय 14. एक्यूट काडांइटिस- हृदय के आसपास तीव्रता से शोथ। 15. एढेरेंट पेरिकार्डियम – पेरिकार्डियम का चिपकना । 16. एक्ञ्हाशन ऑफ दी हार्ट मसल्स -हृदय की पेशियों का थकना। 17. साइनस अरिथेमा – अस्थि गुहा लालिमायुक्त त्वचा। 18. हार्ट फेल्योर -हृदय की धड़कन का बंद होना। 19. आर्टिकुलर फ्लटर- हृदय के कार्य की गति अति तीव्र होना। 20. मायोकार्डियल इनफ्रेकशन – यानि हार्ट अटैक – दिल का दौरा |

दिल की बीमारी के कारण / Heart disease main Causes.

  • मानसिक तनाव– इससे रक्त में खराब किस्म की वसा (Bad Cholesterol) बढ़ जाती है, जिससे रक्त की नलियों में संकुचन उत्पन्न हो जाता है। यह भी दिल की बीमारी होने के कारणों में शामिल है |
  • मांसाहार- जानवर को मारते समय उसके शरीर से कुछ ऐसे रासायनिक तत्व पैदा होते हैं, जो शरीर में पहुंच कर हृदय को नुकसान पहुंचाते हैं और उच्च रक्तचाप उत्पन्न करते हैं। इसके अलावा अधिक प्रोटीन से हृदय के अलावा गुर्दे और लिवर को भी हानि पहुंचती है जिससे दिल की बीमारी हो सकती है।
  • बैठे रहने का काम- अधिकांश नौकरियों, व्यवसायों में जो लोग बैठ कर घंटों काम करते हैं और प्रतिदिन घूमना या व्यायाम नहीं करते, उनकी पाचन क्रिया में खराबी आती है, शरीर में चर्बी वाले तत्व बढ़ जाते हैं, रक्तचाप बढ़ता है, जिससे दिल की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।
दिल की बीमारी / heart disease in hindi

दिल की बीमारी Heart Disease

  • आनुवंशिकता- माता-पिता और दादा-दादी को दिल की बीमारी रही हो, तो उनकी संतानों में भी यह बीमारी होने की पूर्ण आशंका रहती है।
  • मधुमेह (Diabetes) व उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)- इन रोगों से पीड़ित व्यक्तियों को उचित इलाज न कराने पर दिल की बीमारी हो जाती है।
  • अधिक वजन/मोटापा-शरीर में जब मोटापा बढ़कर अधिक वजन हो जाता है, तो दिल की बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • चरबीयुक्त भोजन- तली हुई वस्तुएं, मेवे, चाकलेट, आइसक्रीम आदि खाने से रक्त में खराब किस्म की चरबी बढ़कर रक्त वाहक हृदय की धमनियों में जम जाती है और उनका संकुचन कर देती हैं, जिससे दिल की बीमारी हो सकती हैं।
  • क्रोध और चिंता- इससे मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है और हृदय व रक्तचाप को हानि पहुंचती है। यहां तक कि हृदय की गति में अवरोध पैदा हो जाता है।
  • ज्यादा गुस्से या तनाव से रक्तचाप बढकर रक्त का प्रवाह बहुत तेज हो जाता है जिससे ह्रदय की बारीक़ नसे रक्त के दबाव से क्षतिग्रस्त हो जाती है | फिर इसी क्षतिग्रस्त हिस्से पर वासा और वाइट सेल्स की रेपरिंग प्रक्रिया के चलते ब्लोकेज होनी शुरू हो जाती है | इसलिए एकदम से आवेश में ना आयें अपनी मानसिक सिथ्ती को स्थिर और बैलेंस रखें |
  • धूम्रपान, तंबाकू, शराब- ये व्यसन हृदय के लिए विष तुल्य होने के कारण घातक परिणाम पैदा करते हैं। शराब हृदय की मांसपेशियों को कमजोर करती है।
  • विटामिन बी और ई की कमी- जब आटे को मैदे के समान महीन बनाकर उपयोग में लेते हैं, तो ये विटामिन नष्ट हो जाते हैं। इन विटामिनों की कमी से दिल, दिमाग और नाड़ियां ठीक तरह से काम नहीं करतीं और शरीर की मरम्मत का कार्य व स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
  • कोलेस्ट्रोल का बढ़ना- बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रोल धमनियों में एकत्र होने लगता है और उसका मार्ग सकरा कर देता है। तंग धमनियों से उच्च रक्तचाप हो जाता है। इनमें रक्त का थक्का अटकने से दिल का दौरा पड़ता है, जो दिल की बीमारी का कारण बनता है।
  • मानसिक आघात- अत्यधिक हर्ष यानी खुशी का मौका या शोक जैसे जिससे हृदय का दौरा (हार्ट अटैक) या हार्ट फेल भी हो जाता है। यह भी पढ़ें –  मानसिक तनाव से मुक्ति पाने के उपाय- Stress Management.
  • आजकल प्रचलित मुनाफाखोर बाजारवादी चिकित्सा पद्धति की दवाइयों के काफी साइड इफ्फेक्ट्स होते है जो अक्सर एक बीमारी निकालकर दूसरी बीमारी के लिए रास्ता तैयार कर देती है | इसलिए सबसे पहले तो अपना रहन सहन और खान पान ऐसे व्यवस्थित रखें की आपको कोई रोग हो ही ना, फिर भी अगर बदकिस्मती से कोई रोग हो भी जाता है तो प्राकृतिक चिकित्सा (Naturopathy) , Alternative Therapies या आयुर्वेद आदि को प्राथमिकता दे | इन चिकित्सा पद्धतियो असर देर से होता है, परंतु इनके साइड इफ़ेक्ट लगभग शून्य होते है |

दिल की बीमारी और आपका खानपान/ Heart Disease & Food.

दिल की बीमारी से बचने के लिए क्या खाएं / Foods To Avoid With Heart Disease.

  • हलका, सुपाच्य, संतुलित भोजन खाएं। मिताहारी बनें।
  • दिल की बीमारी से बचने के लिए हाई फाइबर युक्त खानपान जैसे -चोकर सहित आटे की रोटी, गेहूं का दलिया, सोयाबीन मिले आटे की रोटी, सोयाबीन की दाल, छिलके वाली मूंग की दाल तथा अंकुरित गेहूं का सेवन करें। तथा फलो और सब्जियों को छिलके सहित खाएँ |
  • ताजा मीठा दही, गाय का दूध, वसा रहित दूध, गुड़, शहद, बादाम, पिस्ता, मकई, छिलका युक्त देसी चना खाएं।
  • फलों में अनार, अंगूर, आंवला, सेब, लीची, अमरूद, नीबू का सेवन करें।
  • सब्जियों में पालक, लहसुन, गाजर, मूली, टमाटर, अदरक, धनिया, प्याज, चौलाई, अरबी खाएं। लहसुन तथा अदरक कोलेस्ट्रोल कम करके रक्त का थक्का बनने से रोकता है।
  • तेलों में सूर्यमुखी (करडी) का तेल, मकई का तेल, सोयाबीन, बिनौले का तेल, तिल का तेल, सरसों के फिल्टर्ड तेल का सेवन करें।
  • मट्ठा या छाछ एक कप की मात्रा में सुबह-दोपहर भोजन के बाद पिएं।

दिल की बीमारी से बचने के लिए क्या ना खाएं / Avoid these foods for a healthier heart.

  • भारी, गरिष्ठ, तेज मिर्च-मसालेदार, चटपटे, तले हुए पदार्थ न खाएं।
  • मांसाहार, अंडा, शराब, तंबाकू, कड़क चाय, कॉफी, पनीर से परहेज करें।
  • घी, मक्खन, वनस्पति घी, नारियल का तेल, पाम तेल, मलाई, मावा, रबडी, खीर, आइसक्रीम, केक, चाकलेट, बिस्कुट का सेवन न करें।
  • नमक का अधिक सेवन न करें |
  • अचार, पापड़, चटनी के सेवन से परहेज करें।
  • मीठी-चीजें, चीनी तथा कोल्ड ड्रिक्स जंक फ़ूड, पिज़्ज़ा ,बर्गर, टिक्की, गोलगप्पे (पनिपुरी) का सेवन कम-से-कम करें।

दिल की बीमारी से बचने के लिए क्या करें /Tips to Prevent Heart Disease & Stroke.

  • आलसी न बनें। शारीरिक मेहनत करें |
  • दिल की बीमारी से बचने के लिए नियमित रूप से रक्त में कोलेस्ट्रोल (Blood cholesterol ) की मात्रा की जाँच तथा  “Full Body Health Checkup” कम से कम साल में एक बार अवश्य करवाए |
  • खान पान में कैलोरी कम से कम लें | जानिए क्यों दिल की बीमारियाँ दूर रखने में लाभकारी है लहसुन 
  • दिल की बीमारी से बचने के लिए प्रातः खुली हवा में नियमित रूप से घूमने जाएं।
  • खेलना, तैरना, सुबह शाम की सैर ,साइकिल चलाना जारी रखें। देखें – जॉगिंग करें फिट रहें – Jogging Tips
  • यार-दोस्तों के साथ मिलें-जुलें। हंसें और हंसाएं। मनोरंजन रोज करें।
  • अपनी क़ाबिलीयत पर विश्वास रखें।आत्म विश्वासी बनें।
  • निगेटिव भावनाओं को पॉजिटिव विचारों में बदल दें।
  • कब्ज से पेट को बचाएं।
  • दिल की बीमारी से बचने के लिए नियमित योगासन एवं प्राणायाम रोजाना करें। पढ़ें हमारा यह लेख – जाने क्या है प्राणायाम? तथा प्राणायाम करने के लाभ |
  • आसपास के काम स्वयं करें।
  • दिल की बीमारी से बचने के लिए भोग विलास और अति आराम तलब जीवन जीने से बचें।
  • निराश, हताश होकर चिंता में ही न डूबे रहें।
  • अपनी सेहत के प्रति लापरवाही न बरतें ।
  • चिंता, क्रोध, मानसिक तनाव, भय को दूर करने का प्रयत्न करें। देखें यह लेख – जाने क्या है ब्रेन वेव जो बढ़ाये मानसिक शांति और शक्ति? |
  • दिल की बीमारी से बचने के लिए अपने शरीर का मोटापा (Obesity) और वजन न बढ़ने दें।

लक्षण : दिल की बीमारी में निम्नांकित प्रमुख लक्षण देखने को मिलते हैं / Heart Disease Symptoms & Signs of Heart Problems.

  • चेस्ट पेन- छाती में बाई और भयंकर दर्द होना, तड़पना और दर्द बांह तक जाना। यह पूर्ण हृदरोध के लक्षण हैं |
  • डिसनिया- श्वास लेने में तकलीफ होना, जरा से परिश्रम से सांस फूलना।
  • पेलपिटेशन- दिल की धड़कनें तेज और बढ़ी हुई होना। यह ह्रदय धमनी रोग के लक्षण हो सकते है |
  • परसिस्टेंट हेडेक- सिर में लगतार दर्द का बना रहना।
  • आथोंपेनिया- लेटने की स्थिति में सांस लेने में कष्ट होना।
  • सिनकोप- मूर्छित यानी बेहोश होना।
  • एंकल्स स्वेलिंग- टखनों पर सूजन आना। पैरों पर भी सूजन होना।
  • स्वेटिंग-इतना अधिक पसीना आना कि शरीर भीग जाए।
  • फेटिंग- बिना किसी खास कारण के थकान महसूस होना।
  • वर्टिगो- चक्कर आना |
  • सीइंग डबल- एक के दो दिखना खतरनाक लक्षण होता है।
  • इन डाइजेशन- अपच से खट्टी या सामान्य डकारें आना ।
  • कार्डियक अरेस्ट- अचानक हृदय की धड़कनें पूरी तरह से बंद होकर मृत्यु होना।

हमे पूरी उम्मीद है की अगर आप इन सब सावधानियो का ठीक से पालन करेंगे तो आपको दिल के रोग नहीं होंगे | फिर भी अगर आपको कोई लक्षण दिखाई दें तो घबराए नहीं अतिशीघ्र दिल की बीमारी का इलाज किसी अच्छे ह्रदय रोग विशेषज्ञ से करवाएं |

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